किरावली समस्याओं का समाधान न होने पर धरना देते लोग फोटो स्रौत किसान मजदूर नेता
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किरावली। किरावली तहसील में आयोजित तहसील दिवस शनिवार को उस वक्त हंगामे की भेंट चढ़ गया, जब जिला स्तरीय अधिकारियों के न पहुंचने से नाराज किसानों ने न केवल दिवस का बहिष्कार किया, बल्कि तहसील मुख्यालय पर ही धरने पर बैठ गए। किसान मजदूर नेता चौधरी दिलीप सिंह के नेतृत्व में किसानों ने आरोप लगाया कि तहसील दिवस अब केवल खानापूर्ति बनकर रह गया है।
चौधरी दिलीप सिंह ने कहा कि तहसील दिवस में पीड़ितों की समस्या सुनने के लिए केवल नायब तहसीलदार, पुलिस के सब-इंस्पेक्टर और विभागों के तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ही पहुंचते हैं। बड़े अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण फरियादियों को न्याय मिलने की उम्मीद टूट चुकी है। बार-बार शिकायत के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। अधिकारियों की बेरुखी से गुस्साए किसान ढाई घंटे तक सभागार के बाहर धरने पर बैठे रहे। तहसील दिवस का समय समाप्त होने के बाद आनन-फानन में तहसीलदार दीपांकर मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारी किसानों की समस्याओं को गंभीरता से सुना। तहसीलदार के ठोस आश्वासन के बाद ही किसानों ने धरना समाप्त किया। किसानों ने तहसीलदार के समक्ष तीन मुख्य समस्याएं रखीं। इनमें रायभा में सविता, सैन व नाई समाज के प्राचीन देवस्थल को स्कूल की चारदीवारी के भीतर कैद किए जाने का विरोध दर्ज कराया। किरावली-अछनेरा रोड पर गोपऊ राजवाह (पुरामना) पर स्थित जानलेवा नहर पुल का तत्काल नवनिर्माण और लोक निर्माण विभाग की ओर से नागर से सहाई तक नहर पटरी रोड के चौड़ीकरण में जा रही किसानों की भूमि का उचित मुआवजा दिलाने की मांग की। किसानों ने चेतावनी दी है कि वे सोमवार को जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी से तहसील दिवस से नदारद रहने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेंगे। धरने में दाताराम लोधी, भूपेंद्र इंदौलिया, बाबूलाल वाल्मीकि, मुकेश सविता, अरविंद चौधरी, गंगाराम माहौर, मूला सविता, राजेंद्र सिंह सोलंकी, भूरा सविता, श्रीराम, तेजप्रकाश, राजवीर, हरविलास और कन्हैया लाल सहित दर्जनों किसान मौजूद रहे।