उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक पर किसानों के साथ फसल बीमा में धोखाधड़ी का आरोप लगा है। आरोप है कि बैंक ने किसान क्रेडिट कार्ड से बीमा प्रीमियम तो काट लिया लेकिन उसे बीमा कंपनी को नहीं भेजा। इससे वर्षा से फसल बर्बाद होने के बाद भी किसानों को बीमा क्लेम नहीं मिल पा रहा है। किसानों ने उपनिदेशक कृषि से इसकी शिकायत की है।
यह धोखाधड़ी बैंक की अछनेरा और व्यारा शाखाओं से संबंधित है। किरावली के गांव मई निवासी प्रेम सिंह का खाता अछनेरा शाखा में है। उन्होंने अपनी आलू फसल का प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के तहत बीमा कराया था। बैंक ने 31 दिसंबर 2025 को उनके खाते से 24942 रुपये का प्रीमियम काट लिया। इसी तरह अछनेरा के गांव व्यारा निवासी मान सिंह ने व्यारा शाखा से केसीसी कराई थी।
बैंक ने उनकी आलू फसल के लिए 21 जनवरी 2026 को 12193 रुपये का प्रीमियम काटा था। किसानों का आरोप है कि दोनों शाखाओं ने यह राशि पीएमएफबीवाई की नोडल बीमा कंपनी एचडीएफसी एग्रो जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड को नहीं भेजी। वर्षा से फसल खराब होने के बाद जब क्लेम के लिए संपर्क किया। तब उन्हें पता चला कि उनका फसल बीमा हुआ ही नहीं है।
किसानों के आरोप पर बैंक का टालमटोल
प्रेम सिंह ने बताया कि बैंक ने बीमा के नाम पर पूरा प्रीमियम काटा था। वर्षा से फसल के नुकसान होने के बाद बीमा के लिए क्लेम किया तो पता चला बैंक ने धोखाधड़ी की है। बीमा कंपनी को प्रीमियम भेजा ही नहीं है। मान सिंह ने कहा कि बैंक पांच महीने तक कोई न कोई बहाना लेकर टहलाती रही है। इसके बाद प्रीमियम की राशि खाते में वापस की है। उन्होंने सवाल उठाया कि अब इस राशि का हम क्या करें, जब वर्षा में फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है।
व्यारा शाखा प्रबंधक लवेश गर्ग ने बताया कि किसान ने जो जानकारी मांगी थी, वह उन्हें दे दी गई है। कोई भी गलत कार्य नहीं किया गया है। अछनेरा शाखा प्रबंधक निरंजन मीणा ने बताया कि प्रीमियम को बीमा कंपनी ने वापस कर दिया था। वह अभी बाहर हैं और नौकरी पर लौटने के बाद मामले की फिर से जांच कराएंगे।
उपनिदेशक कृषि मुकेश कुमार ने बताया कि उन्हें किसानों की शिकायतें मिली हैं। बीमा कंपनी को पत्र लिखा गया है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि चूक कहां हुई है। उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को उनके नुकसान की भरपाई की जा सके।