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सूदखोरों के तगादे से तंग किसान ने दी जान

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मृतक रामवीर का फाइल फोटो - फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। सूदखोरों के तगादे से तंग आकर किसान ने गले में फंदा लगाकर जान दे दी। गांव औड़ेंय निवासी किसान का शव मंगलवार सुबह गांव के बाहर आम के पेड़ पर लटका मिला। किसान के पास महज एक बीघा ही खेत है। कोतवाली क्षेत्र के गांव औड़ेंय निवासी 45 वर्षीय किसान रामवीर शर्मा की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी।
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एक बीघा खेत से ही पत्नी और पांच बच्चों का भरण पोषण करते थे। वहीं, खाली समय में चाट का ठेल भी लगाते थे। परिजनों के अनुसार सोमवार की शाम करीब साढ़े आठ बजे वह घर पहुंचे और खाना खाने के बाद खेत पर फसल की रखवाली करने की बात कहकर चले गए थे।
देर रात तक जब वह घर नहीं लौटे तो परिजनों ने सोचा की शायद वह खेत पर ही रुक गए होंगे। मंगलवार की सुबह करीब चार बजे ग्रामीणों ने परिजनों को बताया कि रामवीर का शव गांव के बाहर आम के पेड़ पर अंगौछा के फंदे पर लटका हुआ है। सूचना मिलने के बाद इंस्पेक्टर कोतवाली ओमहरि वाजपेई भी पुलिसबल के साथ पहुंचे।
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पुलिस ने शव को उतरवाने के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेजा। परिजनों ने बताया कि साहूकारों से मोटे ब्याज पर करीब चार लाख रुपये का कर्ज ले रखा था। आए दिन तकादागीर घर पर आकर ताने देते हुए रुपये जल्द लौटाने की धमकी देते थे। आए दिन की इस जिल्लत से तंग आकर ही रामवीर ने जान दे दी।
तंगहाली में गुजर बसर कर रहा किसान रामवीर घर का मुखिया व अकेला कमाने वाला था। पत्नी रीमा देवी के अलावा 16 वर्षीय पुत्री रोशनी, 13 वर्षीय पुत्र अमन, नौ साल की आकांक्षा, छह साल की सलौनी और तीन साल का पुत्र आयुष है। परिजनों के अनुसार परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। ऊपर से लिए गए कर्ज का ब्याज तेजी के साथ बढ़ता जा रहा था। इससे वह परेशान रहते थे।
परिजनों की ओर से कर्ज के चलते आत्महत्या करने की बात कही गई है। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया है। जांच करके आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-ओमहरि वाजपेयी, इंस्पेक्टर कोतवाली
औडेंय पडरिया निवासी किसान रामवीर शर्मा पुत्र रामलाल शर्मा खेती करते थे। खेती से जब परिवार का खर्चा नहीं चला तो उन्होंने चाट का ठेला लगाना शुरू कर दिया। खेती करने के लिए और घरेलू जरूरतें पूरी करने के लिए उन्होंने सूदखोरों से कर्जा भी लिया। दिनरात मेहनत करके किसी तरह परिवार पालना शुरू किया।
उसे अपनी बेटियों की शादी की चिंता सताने लगी। कर्ज में डूबे किसान ने तनाव के चलते फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। अब रामवीर की पत्नी के सामने संकट खड़ा हो गया है। रोशनी 16, अमन 13, आकांक्षा नौ, सलौनी छह तथा आयुष तीन का पेट रामवीर की पत्नी कैसे पालेगी इसे लेकर वह परेशान हैं। उन्हें बड़ी बेटी रोशनी के हाथ पीले करने की चिंता सता रही है।
कर्ज के चलते किसान द्वारा आत्महत्या किए जाने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पूर्व भी कई किसान फसल बरबाद होने, साहूकारों के कर्ज से परेशान होकर जान दे चुके हैं। किसानों की इस दशा में मौत की एक वजह सूदखोर भी हैं। जो मोटे ब्याज पर किसानों की जमीन आदि गिरवीं रख लेते हैं।
ब्याज की रकम दिन दूना रात चौगुनी तेजी के साथ बढ़ती है। रुपये वापस न मिलने पर यह खेत खलिहान तक पर कब्जा कर लेते हैं। तंग आकर किसान को खुदकुशी का रास्ता चुनना पड़ जाता है।
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