कासगंज। जिले से कई नदियां गुजरती हैं इसके बाद भी किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें दिखाई दे रही हैं। लड़खड़ाती बिजली व्यवस्था के कारण खेतों के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है। वहीं नहरों का रोस्टर किसानों को रुला रहा है। नहरें भी सूख गई हैं।
रबी की फसलों की बुवाई शुरू हो गई है। किसान अगैती गेहूं, जौ की फसलों के लिए खेतों में जुताई और बुवाई कर रहे हैं। इसके लिए खेतों को पलेवा की जरूरत है। अब जब गोरहा और हजारा नहर सूखी पड़ी हैं तो फिर खेतों को पानी नहीं मिल पाएगा। किसान परेशान हैं। सिंचाई विभाग का सिर्फ एक ही जवाब है कि नहर में पानी रोस्टर के अनुसार छोड़ा जाएगा। 15 दिसंबर से नहरों में पानी आएगा। जबकि खेतों को पानी की अभी जरूरत दिखाई दे रही है। इधर विद्युत आपूर्ति भी व्यवस्थित रूप से नहीं मिल पा रही है। इस कारण निजी नलकूपों से भी खेतों की व्यवस्थित सिंचाई नहीं हो पा रही। विद्युत और सिंचाई विभाग की अनदेखी से किसान परेशान हैं।
भाकियू ने दी चेतावनी
भारतीय किसान यूनियन भानु ने चेतावनी दी है कि किसानों को व्यवस्थित रूप से नहरों से पानी नहीं मिला तो आंदोलन किया जाएगा। यूनियन के मंडल अध्यक्ष श्यामवीर सिंह ने कहा कि सिंचाई विभाग ने तमाम किसानों को अवैध कुलावे के मामले में फर्जी तरीके से नोटिस तो पूर्व में जारी कर दिए थे और अब जब खेतों को पानी की जरूरत है तो सिंचाई विभाग गंभीर नहीं दिख रहा।
आंकड़े की नजर से-
- 40000 हेक्टेयर क्षेत्रफल भूमि नदियों से सिंचाई पर है निर्भर।
- 50000 हेक्टेयर क्षेत्रफल भूमि को नहरों के माध्यम से मिलता है पानी।
क्या कहते हैं किसान-
- खेतों को जब पानी की जरूरत है तो नहरें सूखी पड़ी हैं। सिंचाई विभाग का रोस्टर समझ से बाहर है। सिंचाई विभाग को नहरों में पानी छोड़ना चाहिए। - हरिओम मिश्रा।
- बिजली की आपूर्ति व्यवस्थित ढंग से नहीं हो रही है। निजी नलकूपों से सिंचाई में समस्या आ रही है। बिजली विभाग और सिंचाई विभाग दोनों ही इस समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहा। - सोनू कुमार।
वर्जन-
- नहरें में रोस्टर के अनुुसार चलती हैं। पंद्रह दिसंबर से नहरों में पानी छोड़ा जाएगा। किसानों को सिंचाई का लाभ दिया जाएगा। - अरूण कुमार, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग।