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आर्थिक तंगी और कर्ज के बोझ से परेशान मजदूर ने लगाई फांसी

Sat, 22 Apr 2017 01:09 AM IST
आर्थिक तंगी और कर्ज के बोझ से परेशान मजदूर ने लगाई फांसी
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आर्थिक तंगी और कर्ज के बोझ से परेशान मजदूर ने लगाई फांसी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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गांव समोखीपुरा में गुरुवार की रात आर्थिक तंगी और कर्ज के बोझ से परेशान मजदूर ने बीमार पत्नी के इलाज की चिन्ता में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। शुक्रवार की सुबह घर के पास नीम के पेड़ पर शव लटका मिलने से परिवार में कोहराम मच गया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया है।
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बाह के समोखीपुरा गांव निवासी संतोष (35) पुत्र राधेश्याम के पास मात्र सवा बीघा जमीन थी। पिछले साल बहन सोनी की शादी के लिए जमीन को गिरवी रख दिया था। शादी के लिए कर्ज भी लिया था। मजदूरी कर अपने परिवार का भरण पोषण करने वाले संतोष कर्ज को नहीं चुका पा रहे थे। तगादा बढ़ गया था। एक माह पहले पत्नी बबीता देवी के बीमार होने पर जांच कराने पर गर्भ में बच्चा उल्टा होने की जानकारी हुई थी। उसके इलाज को लेकर संतोष चिंतित था। दो दिन पहले मां श्रीदेवी ने बबीता के इलाज के लिए कहा तो उसने पत्नी और मां के साथ मारपीट कर दी थी। कर्ज के बोझ, आर्थिक तंगी और पत्नी के इलाज को लेकर परेशान संतोष गुरुवार की रात घर से निकल गए। पास के ही खेत में खडे़ नीम के पेड़ से फांसी लगाकर जान दे दी। सुबह जब शव पेड़ से लटका मिला तो परिवार में कोहराम मच गया। सूचना पर पहुंचे  एसएचओ प्रदीप कुमार ने बताया कि आर्थिक तंगी के चलते संतोष ने खुदकुशी की है। उनके छह बच्चे हैं।
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पांच बेटियों की परवरिश और पत्नी के इलाज का सवाल
बाह। संतोष की खुदकुशी के बाद बेटी किरन (11), आकांक्षा (9), चांदनी (7), वंदना (5), अंशिका (3) और पुत्र शिवम (डेढ़ साल) की परवरिश का सवाल खड़ा हो गया है। उनकी पत्नी बबीता देवी होश में आने पर इस चिंता को व्यक्त कर रही हैं। उन्होंने बताया कि कर्ज होने के कारण बच्चों को रोटी भी ठीक से नसीब नहीं हो रही थी। आठ माह की गर्भवती बबीता ने बताया कि आर्थिक तंगी के चलते परिवार में कहासुनी हो जाती थी। मृतक की मां श्रीदेेवी का भी रो-रोकर बुरा हाल है।
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पिता के लापता होने के बाद आ गई थी परिवार की जिम्मेदारी
बाह। संतोष के पिता राधेश्याम अहमदाबाद में नौकरी करते थे। 18 साल पहले बेटी की शादी के लिए सामान और रुपये लेकर घर लौट रहे थे। आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर उनका सूटकेश तो मिल गया था लेकिन तब से राधेश्याम का कोई पता नहीं चला। बड़ा बेटा होने के नाते संतोष पर परिवार की जिम्मेदारी आ गई थी। बहनों की शादी के बाद छोटे भाई मनोज की शादी भी इसी साल करनी थी।
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