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खैंच लाल्ली खैंच, नैक और खैंच

Fri, 08 Apr 2016 12:52 AM IST
अमर उजाला आगरा
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पुल‌िस भ्‍ारती दाौड़ - फोटो : अमर उजाला ब्‍यूूराो
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 सुबह के सात बजे हैं। पहले राउंड की दौड़ पूरी होने जा रही है। ट्रैक पर 180 अभ्यर्थी दौड़ रही है। फाइनल राउंड आ गया है। दौड़ की रफ्तार बढ़ गई है। बाहर खड़े उनके अभिभावकों की नजरें उनके साथ ही पूरे ट्रैक पर दौड़ रही हैं। जैसे ही दौड़ खत्म होने को आई है, सब चिल्लाने लगे हैं। बेटी का हौंसला बढ़ाने के लिए पूरी जोर से बोल रहे हैं। कोई कह रहा, खैंच लाल्ली खैंच, नैक और खैंच। किसी के बोल हैं, भाज गुड्डी भाज, पूरे जोर तै भाज।
धड़कनें बढ़ी हुई हैं। चेहरों पर टेंशन पढ़ी जा सकती है। एक एक पल कीमती है। कई अभ्यर्थी पांचवें राउंड में ही हिम्मत हार चुकी है। उनके अभिभावक ों के मानो दिल ही बैठ गए हैं। माथा पकड़ लिया है। लेकिन बाकी दौड़ रही हैं। सिर्फ छह राउंड पूरे करना काफी नहीं है। 15 मिनट हो चुकी हैं। अगर अगले 60 सेकेंड में दौड़ पूरी नहीं हुई तो बिटिया को खाकी वर्दी पहनाने का सपना टूट जाएगा। इसलिए चिल्ला रहे हैं पूरी जोर लगाकर।
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पुलिस लाइन में अंदर ट्रैक है। बाहर बैरियर लगे हैं। बैरियर से सटकर खड़े हैं अभिभावक। जिनकी बेटियां 15 मिनट से पहले दौड़ पूरी कर चुकी हैं, उनके चेहरों पर विजयी भाव हैं।
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कोसीकलां (मथुरा) से गोविंद सिंह अपनी बेटी सुंदरी का फिजिकल टेस्ट कराने आए हैं। उन्हें जैसे ही पता चला कि बेटी पास हो गई, तो खुशी से उछल पड़े। वृन्दावन के महावीर सिंह की बेटी गीता ने भी दौड़ की परीक्षा पास कर ली है। उनकी प्रतिक्रिया है, कडी मेनहत की है बेटी ने, उसी का फल है। अरहेरा (मथुरा) के वीरेंद्र अपनी भाभी कमलेश की दौड़ पूरी कराने आए हैं। उनका चेहरा भी खिल गया।
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