आगरा में पुलिस अफसर और काउंसलर के सामने पति ने साथ रहने की हामी भर ली। कागजों पर समझौता कर पत्नी को मायके यह कहते हुए भेज दिया कि जल्द आकर ले जाएंगे। तब से पत्नी ससुराल लौटने का इंतजार कर रही और पति टालमटोल। परेशान होकर ऐसी तीन पीड़ित महिलाओं ने दोबारा पुलिस से मदद मांगी है। उनका कहना है कि सभी के सामने समझौता करने के बाद पति के इस व्यवहार से वो हैरान हैं। पुलिस ने उन्हें फिर साथ बैठकर बातचीत करने का भरोसा दिया है।
शाहगंज क्षेत्र की युवती की शादी दो साल पहले धनौली के रहने वाले युवक के साथ हुई थी। महिला का आरोप है कि पति उसे अच्छे से नहीं रखता है न ही उसे खर्चे के लिए पैसे देता है। अगर वो उसे कुछ कहती है तो उसके साथ मारपीट करता है। छह माह पहले वह मायके आ गई और पुलिस में शिकायत की। मामला परिवार परामर्श केंद्र में पहुंचा। दोनों की काउंसिलिंग कराई गई। 12 जून को दोनों में समझौता हो गया। पति ने कहा था कि वह मायके आकर दो दिन बाद ले जाएगा। पर, अब तक नहीं आया। रविवार को महिला ने परिवार परामर्श केंद्र पहुंच कर शिकायत की।
थाना जगदीशपुरा की रहने वाली युवती की शादी चार साल पहले थाना क्षेत्र के ही युवक के साथ हुई थी। पति प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता है। एक बच्चा है। पत्नी का आरोप है कि पति रोजाना शराब पीकर मारपीट करता है। सास और ननद भी परेशान करती हैं। शिकायत महिला थाने में की थी। पति-पत्नी को काउंसिलिंग के लिए बुलाया गया। तीन तारीखों के बाद दोनों में 15 जून को महिला थाने में समझौता हुआ। पति ने कहा कि व पत्नी को जल्द ले जाएगा। तब से वह मायके में इंतजार कर रही है। पति लेने नहीं आया। महिला ने दोबारा फाइल खुलवाई है।
कमला नगर की रहने वाली युवती की शादी एक साल पहले किरावली निवासी युवक के साथ हुई थी। पत्नी का आरोप है कि पति का किसी और महिला के साथ संबंध है। इसलिए वह पति के साथ रहना नहीं चाहती है। इसकी शिकायत महिला थाने में की। दोनों पक्षों को बुलाकर काउंसिलिंग की गई। समझाने पर बात बन गई। समझौता हो गया। पति ने कहा कि वह एक हफ्ते बाद शहर में किराए पर रूम देखकर ले जाएगा। 15 दिन बीत गए लेकिन पति ले जाने नहीं आया। महिला थाने पर आकर महिला ने शिकायत की है।
परिवार परामर्श केंद्र प्रभारी कमर सुल्ताना व महिला थाने की एसओ रंजना सचान का कहना है कि कुछ मामलों में ऐसी दिक्कतें आ जाती हैं। काउंसिलिंग में सभी के सामने समझौता करने के बाद पति या पत्नी मुकर जाते हैं। उन्हें फिर बुलाकर समझाया जाता है। बात बनी तो ठीक वरना मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है।