मथुरा में फर्जी शिक्षकों पर कार्रवाई से मैनपुरी जिले में यह मामला जोर पकड़ने लगा है। जिले में बड़ी संख्या में फर्जी शिक्षक नौकरी कर रहे हैं। इसका दावा कोई और नहीं बल्कि एसआईटी कर चुकी है।
पूर्व बीएसए रामकरन यादव ने शिक्षकों के फर्जीवाड़े का खुलासा किया था। उन्होंने 29 हजार शिक्षक भर्ती में आठ, 10 हजार शिक्षक भर्ती 2014 में 13 तथा 10800 शिक्षक भर्ती 2013 में 10 शिक्षक-शिक्षिकाओं के अभिलेख फर्जी पाए थे।
पूर्व बीएसए ने इन शिक्षकों के विरुद्ध थाना कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सभी 31 फर्जी शिक्षकों को उनकी सेवा से बाहर कर दिया गया था। पूर्व बीएसए रामकरन यादव के जनपद से जाते ही इनका मामला भी ठंडे बस्ते में पड़ गया।
आज तक नहीं की गई कार्रवाई
पुलिस आज तक इन फर्जी शिक्षकों को गिरफ्तार नहीं कर सकी। वहीं एसआईटी ने जनपद में तैनात 80 शिक्षकों के अभिलेख फर्जी पाए। जो आज भी सेवारत रहते हुए वेतन हासिल कर रहे हैं।
पूर्व बीएसए रामकरन यादव ने जिले में फर्जी शिक्षकों की जांच कराई थी। जांच के दौरान फर्जी पाए जाने पर 31 शिक्षकों के विरुद्ध थाना कोतवाली में मामला दर्ज कराया गया था।
मथुरा में जहां फर्जी शिक्षकों को तीन दिन के अंदर ही गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। वहीं मैनपुरी में डेढ़ साल बाद भी फर्जी शिक्षकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
इतने शिक्षक हैं फर्जी
मैनपुरी में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से बीएड करने वाले 80 शिक्षकों को एसआईटी ने फर्जी घोषित किया था। इन शिक्षकों को पहले सेवा से बर्खास्त किया गया। लेकिन मामला कोर्ट में पहुंचने के बाद इन शिक्षकों के लिए जारी बर्खास्तगी आदेश निरस्त कर दिया गया। ये फर्जी शिक्षक वर्तमान में भी वेतन पा रहे हैं।
बीएसए विजय प्रताप सिंह ने बताया कि एसआईटी ने जिन शिक्षकों के अभिलेख फर्जी पाए थे। उन्हें पूर्व में बर्खास्त किया गया था, लेकिन कोर्ट की स्टे के बाद उनका वेतन जारी कर दिया गया। अभी तक इस संबंध में उच्चाधिकारियों के कोई निर्देश नहीं मिले हैं। जैसे ही निर्देश मिलेंगे कार्रवाई की जाएगी।