डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय की बीएड की फर्जी मार्कशीट मामले की जांच में परत दर परत नए खुलासे हो रहे हैं। एसआईटी की जांच में 22 अभ्यर्थियाें की स्नातक की मार्कशीट भी फर्जी पाई गई। इन्होंने शिक्षा माफिया से सांठगांठ कर स्नातक की मार्कशीट तैयार करा ली। एसआईटी ने इनके खिलाफ संबंधित जनपदों में एफआईआर भी दर्ज करा दी है।
बीएड फर्जी मार्कशीट मामले में एसआईटी संबंधित कालेजों में पहुंचकर अभ्यर्थियों के शैक्षणिक रिकार्ड खंगाल रही है। ऐसे ही 22 अभ्यर्थियों की जांच करने के लिए टीम आरबीएस कालेज पहुंची। इन्हाेंने इस कालेज से 2007-08 में बीए उत्तीर्ण दिखाया था। टीम ने अभ्यर्थियों के फीस शुल्क, उपस्थिति रजिस्टर और लाइब्रेरी कार्ड भी जांचा, लेकिन इनका कोई रिकार्ड नहीं मिला। सूत्र बताते हैं कि इसमें अधिकांश अभ्यर्थी बागपत, मैनपुरी, फीरोजाबाद में बतौर सहायक अध्यापक के पद पर सेवारत हैं।
ऐसे पकड़ में आ रहे हैं मामले
- गोपनीय चार्ट से संबंधित अभ्यर्थी का शैक्षणिक रिकार्ड लेकर टीम उनके स्नातक और बीएड करने वाले कालेज पहुंच रही है। छात्राें के उपस्थिति रजिस्टर, आईकार्ड, पुस्तकालय कार्ड, फीस रसीद जैसी जानकारी जुटाई। शिक्षा माफिया इसी में चूक कर गए, इन्हाेंने बीएड की मार्कशीट जनरेट करने के साथ कालेजाें में यह रिकार्ड जनरेट नहीं करा पाए।
संजय प्लेस में पकड़ी थी प्रिंट होती मार्कशीट
- विश्वविद्यालय का नाता सिर्फ बीएड की फर्जी मार्कशीट से ही नहीं जुड़ा। 2010-11 में तत्कालीन कुलसचिव शत्रुघभन सिंह ने संजय प्लेस के एक बेसमेंट में छापा मारा था। यहां विवि की मार्कशीट छापी जा रही थीं। इसमें अधिकांश बीए की मार्कशीट रहीं, जोे अलग-अलग सत्राें की थी। छापे में यहां से भारी मात्रा में नकली मार्कशीट बरामद हुई थी। खास बात रहस्मय तरीके से यहां कोई नहीं मिला। बताया जाता है कि मुख्य आरोपी को बचाने के लिए बड़ा ‘सौदा’ हुआ।