शाहगंज क्षेत्र की युवती की छह महीने पहले फेसबुक पर फर्जी आईडी बना दी गई थी। इस पर एस्कॉर्ट सर्विस के लिए संपर्क करने के लिए लिख दिया गया था। इससे युवती तनाव में आ गई थी। आरोपी मोहल्ले के पास का निकला था।
केस : 2
जगदीशपुरा क्षेत्र की एक शिक्षिका की फेसबुक पर फर्जी आईडी बना ली गई थी। इस पर भी एस्कार्ट सर्विस के लिए कॉल करने के लिए लिख दिया गया था। शिक्षिका का छात्र निकला था। पुलिस ने आरोपी को साथी के साथ जेल भेजा था।
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केस : 3
ताजगंज क्षेत्र की महिला के नाम से इसी तरह फर्जी आईडी बनाई गई थी। महिला तीन महीने से तनाव में हैं। पुलिस ने मामले की जांच की थी। इसके बाद एक आरोपी को पकड़ लिया गया। वह महिला के पति का मित्र था।
शोहदे सोशल मीडिया को नया हथियार बना रहे हैं। दोस्ती में असफल होने और एकतरफा प्यार में फर्जी आईडी बनाकर युवतियों और महिलाओं को बदनाम कर रहे हैं। ये तीन केस इस बात की तरफ इशारा कर रहे हैं। रेंज साइबर सेल, रेंज साइबर थाना और जिला साइबर सेल में वर्ष 2020 में 40 मामले ऐसे आए हैं। इसलिए सोशल साइटस के इस्तेेमाल में सावधानी जरूरी है।
ज्यादातर मामलों में फर्जी आईडी बनाते हैं परिचित और जानकर युवक
रेंज साइबर सेल के प्रभारी निरीक्षक शैलेष कुमार सिंह ने बताया कि फेसबुक पर फर्जी आईडी बनाने वाले ज्यादातर परिचित और दोस्त होते हैं। उनके मोबाइल नंबर को पता करते हैं। फेसबुक और व्हाट्सएप प्रोफाइल से फोटो कापी कर लेते हैं। ऐसे में मामलों में शिकायत मिलने पुलिस आईडी बनाने वाले के बारे में पता करती है। कई बार युवती और महिलाएं शिकायत वापस भी ले लेती हैं। इस वजह से आरोपियों पर कार्रवाई नहीं हो पाती है।
प्रोफाइल की सुरक्षा पर नहीं ध्यान देते हैं लोग
जिला साइबर सेल के एक्सपर्ट विजय तोमर ने बताया कि फेसबुक पर किसी अनजान व्यक्ति की फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट नहीं करें। अपना पासवर्ड बदलते रहें। पासवर्ड में अपनी निजी जानकारी नहीं रखें। हमेशा अपर, लोअर, न्यूमेरिक, सिंबल और आठ से 32 अंकों का बनाएं। किसी को मैसेंजर पर अपना पासवर्ड, पिन अन्य निजी जानकारी शेयर न करें। परिचित हैं तो फोन कॉल अवश्य करें। प्रोफाइल को लॉक रखें। सेटिंग प्राइवेसी लगातार चेक करते रहें। अपनी निजी जानकारी पर ओनली मी अपडेट करें।