रजिस्ट्री कार्यालय से बाहर निकती एसआईटी की टीम
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आगरा में बेशकीमती जमीनों के फर्जी बैनामे लगाकर कब्जा करने वाले माफियाओं पर पुलिस सख्त कार्रवाई नहीं कर पाई है। गिरोह के मास्टरमाइंड अब तक पकड़ से दूर हैं। एसआईटी ने जमीनों का सत्यापन पूरा कर लिया है। मगर, तहसील में सक्रिय दलाल हाथ नहीं आ पा रहे हैं। फर्जी दस्तावेज तैयार करने का खेल काैन और कैसे कर रहा था, इससे पर्दा नहीं उठ सका है। फरार 4 आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए भी पुलिस टीम लगी है।
शहर कई इलाकों में जमीन खाली पड़ी हैं। इन पर भूमाफियाओं की नजर रहती है। वर्ष 2024 में बोदला जमीन प्रकरण सामने आया था। करोड़ों की जमीन पर कब्जा करने के लिए दो फर्जी मुकदमे दर्ज कराकर केयरटेकर के परिवार को जेल भेजा गया। अब तहसील में फर्जी बैनामा लगाकर जमीनों की साैदेबाजी का खुलासा हुआ। मामले में प्रशासन की ओर से 21 जनवरी को शाहगंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें 23 जनवरी को सेवानिव़ृत्त रिकाॅर्ड कीपर देवदत्त शर्मा, बृजेश दुबे, सुमित अग्रवाल, भानू प्रताप रावत और राजकुमार को जेल भेजा था। आरोपी प्रशांत और अजय सिसौदिया पहले से जेल में बंद हैं। चार आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। इसी तरह कई और जमीनों पर कब्जे की शिकायत एसआईटी के हेल्पलाइन नंबर मिली थीं।
एसआईटी ने 11 जमीनों के फर्जी बैनामे मिलने पर सत्यापन किया। इनमें जमीन के आसपास रहने वालों के बयान भी लिए। सत्यापन का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। आशंका है कि जमीनों के फर्जी बैनामे वालों के तार भूमाफियाओं से जुड़े हुए हैं। यह लोग जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार कराने से लेकर साैदे कराने तक में शामिल रहते हैं। 150 करोड़़ की जमीनों के कागजात भी भूमाफियाओं ने तैयार किए। एसआइटी के अध्यक्ष एसीपी सदर विनायक भोंसले ने बताया कि सभी तथ्यों की गहराई से पड़ताल की जा रही है। कई भूमाफिया के बारे में जानकारी मिली है। साक्ष्य संकलन किया जा रहा है। साक्ष्य मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।