25 हजार रुपये की असली नकदी देकर बदायूं से एक लाख रुपये के नकली नोट खरीदने वाले दो आरोपियों को कासगंज पुलिस ने गिरफ्तार किया है। जांच में बदायूं में बैठे सरगना के नेटवर्क का पता चला है और कांवड़ यात्रा मेले में बड़ी मात्रा में जाली नोट खपाने की आशंका जताई जा रही है।
कासगंज में नकली नोटों का कारोबार तेजी से पैर पसार रहा है। एक महीने के भीतर दूसरी बार जाली नोटों के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। बृ़हस्पतिवार को सोरोंजी में एक लाख रुपये के नकली नोटों के साथ दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद यह साफ हो गया है कि जिले में लंबे समय से एक संगठित गिरोह सक्रिय है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस कारोबार का मुख्य सरगना पड़ोसी जिले बदायूं में बैठकर पूरा नेटवर्क संचालित कर रहा था।
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सोरोंजी थाना पुलिस और एसओजी द्वारा बृहस्पतिवार रात गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों के तार सीधे बदायूं से जुड़े हैं। और इनमें से एक आरोपी वहीं का रहने वाला है। पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी बदायूं के सरगना से महज 25 हजार रुपये असली नकदी देकर एक लाख रुपये के जाली नोट खरीदते थे। इसके बाद त्योहारों और मेलों की भारी भीड़ का फायदा उठाकर इन्हें बाजार में खपाया जाता था।
पुलिस मामले में पड़ताल कर रही है कि क्या इन आरोपियों ने हालिया कांवड़ यात्रा के दौरान भी भारी मात्रा में नकली नोट बाजार में उतारे थे। कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर रिमांड पर लेकर इनसे और कड़ाई से पूछताछ की जाएगी ताकि इस पूरे सिंडिकेट को ध्वस्त किया जा सके।
एक माह पहले एसटीएफ ने की थी कार्रवाई
जिले में नकली करेंसी का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले 7 अगस्त को यूपी एसटीएफ ने गंजडुंडवारा के गणेशपुर निवासी अजीम खान और राजा उर्फ समीरुल को लखनऊ से पकड़ा था। इनके पास से 500-500 के 201 जाली नोट बरामद हुए थे। वहीं, 13 मई 2026 को अलीगढ़ पुलिस ने इसी गैंग के चार सदस्यों को गिरफ्तार कर 7,70,00 लाख रुपये के नकली नोट पकड़े थे।
उस कार्रवाई में पकड़े गए गंजडुंडवारा के गणेशपुर निवासी जिकरूल हसन और सहावर के गांव सेवनपुर निवासी आसिफ के तार भी इसी नेटवर्क से जुड़े बताए जा रहे हैं। जिकरूल हसन एटीएस द्वारा गिरफ्तार राजा उर्फ समीरूल हसन का भाई है।