फैक्टरी में काम करने वाले एक कारीगर के लिए फैक्टरी मालिक मसीहा बन गया। पत्नी के लिए बमुश्किल मिलने वाले ओ पॉजिटिव खून की प्लेटलेट्स के लिए रक्तदाता न मिलने से कारीगर परेशान था। जब इस बात की जानकारी फैक्टरी मालिक को हुई, तो वे खुद ही कारीगर की पत्नी को अपना खून देने के लिए ब्लड बैंक पहुंच गए।
फिरोजाबाद में एक फैक्टरी मालिक ने मानवता की ऐसी मिसाल पेश की कि हर कोई युवा उद्यमी का तारीफ कर रहा है। दरअसल कारखाने के कारीगर की पत्नी को प्लेटलेट्स की जरूरत थी। ओ पॉजिटिव खून की प्लेटलेट्स बहुत मुश्किल से मिलती हैं। जब इसकी जानकारी युवा उद्यमी हिमांशु पाराशर को हुई तो वे खुद को रोक नहीं सके। काम छोड़कर वे प्राइवेट ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। प्लेटलेट्स का जंबो पैक देने के साथ ही पैथोलॉजी का खर्च भी खुद उठाया।
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कारीगर को परेशान देख पूछी थी समस्या
औद्योगिक आस्थान नगला भाऊ में कांच चूड़ी कारखाने के भागीदार हिमांशु पाराशर युवा उद्यमी हैं। कुछ दिन पूर्व दैनिक कामकाज के दौरान उन्होंने देखा कि कारखाने में काम करने वाले चूड़ी कारीगर सगीर अब्बासी बेहद परेशान हैं। हिमांशु जब पास पहुंचे तो सगीर की आंखों से आंसू निकल पड़े। पूछने पर सगीर ने बताया कि उसकी पत्नी को कई दिन से तेज बुखार व सांस लेने में दिक्कत है। वह प्राइवेट ट्रामा सेंटर में भर्ती है।
मदद करने से नहीं रोक सके खुद को
उसने बताया कि पत्नी की प्लेटलेट्स काफी कम हो चुकी हैं। डॉक्टर ने कुछ घंटों के भीतर ही ओ पॉजिटिव व्यक्ति की प्लेटलेट्स का जंबो पैक चढ़ाने को कहा है। पूरी आपबीती सुनकर हिमांशु अपना कामकाज छोड़ सीधे ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। डॉक्टर से मिलकर पूरी जानकारी की। अपनी जांच कराई। ब्लड ग्रुप सगीर की पत्नी से मेल खा जाने के बाद उन्होंने खुद ही अपनी प्लेटलेट्स दे दी।
खुद दिया पैथोलॉजी का बिल
इतना ही नहीं कारीगर आर्थिक तंगी से भी जूझ रहा था, इसके चलते चूड़ी कारखाने के भागीदार हिमांशु पाराशर ने पैथोलॉजी का करीब दस हजार रुपये के बिल का भुगतान भी किया। साथ ही किसी भी परेशानी में मदद करने का उसे आश्वासन दिया।