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मदरसा छात्रों की स्कॉलरशिप में बड़ा घपला, फर्जी तरीके से बैंक खाते खोल हड़पे 40 लाख रुपये

Thu, 29 Nov 2018 08:13 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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आगरा में थाना एत्माद्दौला पुलिस और साइबर क्राइम सेल ने एक ऐसा गैंग पकड़ा है, जिसने न सिर्फ भारतीय स्टेट बैंक की फाउंड्री नगर शाखा के कई खातों के मोबाइल नंबर बदलकर खातों से लाखों रुपये निकाल लिए, बल्कि दो फर्जी मदरसों के एक हजार विद्यार्थियों के नाम पर फर्जी तरीके से बैंक खाते खोलकर 40 लाख रुपये की स्कॉलरशिप हड़प ली। 
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पुलिस ने दो ग्राहक सेवा केंद्रों के संचालकों सहित पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनके पास से बड़ी संख्या में पासबुक, एटीएम कार्ड सहित खाता खोलने के उपकरण, कंप्यूटर बरामद किए गए हैं।

प्रेसवार्ता कर एसपी क्राइम मनोज कुमार सोनकर ने गुरुवार को बताया कि आरोपियों में नितिन चौहान (नई आबादी, राम बिहार कालोनी, टेढ़ी बगिया), राकेश कुमार (धौरऊ, हसनपुर, खंदौली), रवींद्र शर्मा (न्यू जनता कालोनी, सदर), उमाकांत (नंदनी विहार, नंदलालपुर) और आदित्य प्रताप सिंह (नई आबादी, टेढ़ी बगिया) हैं। 
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आरोपियों के पास से एक सीपीयू, एक एलसीडी मॉनीटर, एक पावर एडेप्टर, दो बायोमेट्रिक स्कैनर, एक पीओएस/ईडीसी मशीन, 254 एसबीआई कियोस्क कस्टमर कार्ड, 9 एटीएम कार्ड, 593 सील पैक एटीएम कार्ड, एसबीआई की 187 पासबुक , तीन चेकबुक , एक कीबोर्ड, एक पावर केबल, एक क्लोन फिंगरप्रिंट (सिलीकॉन) बरामद हुए हैं। 
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फर्जीवाड़ा : 1

पकड़े गए पांचों आरोपी - फोटो : अमर उजाला
पुलिस ने बताया कि मुख्य आरोपी नितिन चौहान ने भारतीय स्टेट बैंक की फाउंड्री नगर शाखा का ग्राहक सेवा केंद्र (सीएसपी) कालिंदी विहार में खोल रखा है। इस कारण वह बैंक में जाता था। बैंक के पूर्व प्रबंधक पंकज कुलश्रेष्ठ की सहमति से बैंक के ही चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी उमाकांत की लॉग इन आईडी से खाताधारकों की जानकारी प्राप्त कर लेता था। 

नितिन की नजर उन खातों पर रहती थी, जिनमें लंबे समय से कोई लेन देन न हो रहा हो। वह खातों के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर को बदल देता था। इसके बाद खातों से रकम पार कर लेता था। पुलिस की जांच में पता चला है कि आरोपी तकरीबन पांच साल से यह काम कर रहा था। उसने अब तक कई खातों से इसी तरह रकम पार कर ली। इसके साथ ही खातों के नए एटीएम कार्ड भी जारी करा लेते थे। उनसे भी रकम निकाल लेते थे। 

पकड़ा गया आरोपी राकेश पोस्टमैन है। वह एटीएम आने पर खाताधारकों को न देकर नितिन को उपलबध करा देता था। नितिन का पड़ोसी आदित्य एटीएम केबिन में जाकर ओटीपी जेनरेट करके पासवर्ड जारी कर लेता था। इसके बाद खाते से रकम निकाल लेते थे। लाखों की रकम गैंग इसी तरह निकाल चुका था। 

खातों से रकम निकालने के बाद रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पूर्व की भांति कर देते थे, जिससे फर्जीवाड़े का पता न तो ग्राहक को चलता था और न ही बैंक कर्मियों को। जब ग्राहक शिकायत करने बैंक आता था तो उसे कर्मचारी एटीएम से पैसा निकलने की जानकारी देते थे। इस कारण लोग कई बार चुप बैठ जाते थे। कई लोगों ने पुलिस को शिकायत भी दर्ज कराई।

फर्जीवाड़ा : 2

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार एक अभियुक्त रविंद्र शर्मा भी बैंक ऑफ इंडिया, आगरा कैंट की शाखा का ग्राहक सेवा केंद्र चलाता है। दो साल पहले मोहम्मद इलियास और मोहम्मद सफी ने रविंद्र से संपर्क किया। दो मदरसों के लिए फर्जी तरीके से खाते खोलने के लिए कहा। 

रविंद्र ने नितिन से संपर्क किया। इसके बाद नितिन चौहान ने बिना केवाईसी के खाते खोलने के लिए 500 रुपये प्रति खाते के हिसाब से कमीशन मांगा। इस पर मदरसा संचालक राजी हो गए। इसके बाद एक हजार खाते खोले गए। खाते खोलने के लिए नया ग्राहक सेवा केंद्र भारतीय स्टेट बैंक की शाखा में खोला गया। इसमें आदित्य का आधार कार्ड लगाया गया। उसकी फिंगरप्रिंट के लिए सिलीकॉन की फिंगरप्रिंट बनाई गई। 

2016-2017 में तकरीबन एक हजार खाते मदरसों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के नाम पर खोल लिए गए। इनमें आधार कार्ड नहीं लगा था। एक खाते के लिए तकरीबन चार हजार रुपये आने थे। इस हिसाब से केंद्र सरकार से मिली 40 लाख रुपये की स्कालरशिप फरवरी 2017 में निकाल ली गई।

खातों में फर्जीवाड़ा, बैंक बेखबर

जिन विद्यार्थियों के खाते खोले गए थे उनमें फोटो लगाने में भी फर्जीवाड़ा किया गया। एक फोटो का इस्तेमाल पांच से सात खातों में किया गया। इसके साथ ही इलियास, सफी, नितिन और आदित्य अपनी फिंगर प्रिंट लगाते थे। आधार लिंक न होने के कारण इन फिंगरप्रिंट का मिलान नहीं होने के कारण फर्जीवाड़ा पकड़ में नहीं आ रहा था। बैंक भी इससे बेखबर था।

खाते के 500 और दो लाख निकालने पर 15 हजार रुपये

पुलिस की पूछताछ में आरोपी नितिन ने बताया कि एक खाता खोलने के लिए उसने मदरसा संचालकों से 500 रुपये तय किए थे। इसके साथ ही जब खातों में रकम आ गई तो हर दिन दो लाख रुपये वह बैंक से निकालकर आया। इसके बदले में उसने 15000 रुपये मदरसा संचालकों से लिए। उन्होंने 20 दिन में 40 लाख रुपये निकाल लिए। आदित्य का सिलीकॉन फिंगर प्रिंट ग्राहक सेवा केंद्र को लाग इन करने में इस्तेमाल करता था।

बैंक प्रबंधक की भूमिका संदिग्ध
पुलिस ने बताया कि पूर्व के प्रबंधक पंकज कुलश्रेष्ठ का ट्रांसफर पलवल, हरियाणा में हो चुका है। उनकी भूमिका संदिग्ध है। पहले तो उनके समय में बैंक के चपरासी का लागइन आईडी बनाया गया। इस पर प्रबंधक ने नितिन को इस्तेमाल करने के लिए दे दिया। ऐसे में उनकी भूमिका की जांच की जा  रही है। इसलिए एक टीम को पलवल भेजा गया है।
 

मदरसे भी फर्जी तो नहीं

पुलिस को आशंका है कि जिन मदरसों के विद्यार्थियों के लिए स्कॉलरशिप आई थी वह भी फर्जी हो सकते हैं। क्योंकि पकड़े गए आरोपी नितिन और आदित्य को मदरसों का पता तक नहीं मालूम है। उनके मोबाइल नंबर तक नहीं हैं। आशंका है कि मदरसे सिर्फ कागजों में ही चल रहे थे। पुलिस को बड़ा घपला सामने आने की आशंका है।

ग्राहक सेवा केंद्र पर खुल सकते हैं खाते
विभिन्न बैंकों के ग्राहक सेवा केंद्र खोले गए हैं। इनमें 10000 से 20000 रुपये लिमिट की धनराशि वाले खाते खोले जा सकते हैं। इसका फायदा ही आरोपी नितिन ने उठाया था। यहां पर पासबुक में भी एंट्री कराई जा सकती थी।

आधार जरूरी होने पर बंद हुए खाते
साल 2017 में सभी बैंक खातों के लिए आधार जरूरी कर दिया गया था। इस कारण बैंक में खोले गए एक हजार खाते बंद कर दिए गए। इस कारण मदरसों के लिए आने वाली स्कालरशिप जारी नहीं हो सकी। वर्ष 2018 में कोर्ट के आदेश के बाद आधार की अनिवार्यता खत्म कर दी गई। इस पर मदरसा संचालकों ने फिर से 600 खाते खोलने का प्लान बनाया। 

इसके लिए नितिन से बात कर ली गई। उसने तैयारी कर ली थी। मगर, उससे पहले ही उसका भांडा फूट गया। इन 600 खातों में चार हजार रुपये प्रति खाते के हिसाब से तकरीबन 24 लाख रुपये की स्कालरशिप आनी थी। यह फरवरी 2019 में जारी कर दी जाती। अब लेन-देन रुकवा दिया गया है।
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कई पीड़ित आए सामने

पुलिस के सामने कई पीड़ित आए हैं। जिनके खातों से यह रकम निकाली गई है। इनमें कई के मुकदमे तक दर्ज नहीं है। पूर्व में एक पीड़ित सरोज देवी के खाते से 45 हजार रुपये निकाल लिए गए थे। वह भी सामने आईं।

टीम में यह रहे शामिल
फर्जीवाड़ा कर लाखों रुपये के गबन का खुलासा करने वाली टीम में साइबर क्राइम सेल प्रभारी एसआई अमित कुमार, सिपाही विजय तोमर, जितेंद्र, बबलू, इंतजार, विकास, थाना एत्माद्दौला के निरीक्षक जैनुल हसन शामिल रहे।

 
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