जो डॉग स्क्वैड दस्ता रेलवे स्टेशन बस स्टैंड और भीड़ भाड़ वाले क्षेत्रों में आंतकियों की सुरागरसी में प्रयोग किया जाता है। वह दस्ता सुरीर में फेल हो गया। एक दिन पहले पुलिस ने इसे लेकर सुरीर कला में जहां विस्फोट हुआ उसके आसपास पूरी खोजबीन की थी। उच्चाधिकारियों को अवगत कराया था कि अब वहां पर कोई विस्फोटक नहीं है।
सोमवार को सुरीरकलां की पोखर में भारी मात्रा में आतिशबाजी में प्रयोग किए जाने वाला विस्फोटक पदार्थ पड़ा मिला। इससे एक तरफ पुलिस की छानबीन पर सवालिया निशान लगता है तो दूसरी और स्थानीय लोगों द्वारा इस बात की आशंका व्यक्त की जा रही है कि हो सकता है अभी ओर लोगों ने भी बारूद और अन्य विस्फोटक सामग्री का भंडारण कर रखा हो।
शनिवार को जोगेन्द्र पुत्र बाबूलाल निवासी सुरीर कलां के घर बारुद भंडारण से हुए विस्फोट से जोगेंद्र की मौत हो गई। और उसकी पत्नी शिवानी व पड़ोसी बॉबी जोशी गम्भीर रुप से घायल हो गया था। हादसे में घायल शिवानी का इलाज आगरा के एसएन अस्पताल में तथा बॉबी का इलाज मथुरा के निजी अस्पताल में चल रहा है, दोनों की हालत गम्भीर बनी हुई है।
जोगेंद्र के घर हुए विस्फोट के बाद पटाखे बनाने में लिप्त मोहल्ले के लोग अपने अपने घरों से बने अधबने और बारूद को समीप ही दुख हरनी पोखर में रातों रात फेंक आये। सोमवार की सुबह ग्रामीणों ने दुख हरनी पोखर में पटाखों के बोरा व खुले पटाखे पोखर में तैरते देख पुलिस को सूचना दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने पोखर में पटाखों को देख जेसीबी मशीन की मदद से निकलवाकर गड्ढा खोदकर दबाया।
पकड़े जाने के डर से फेंका भंडारण
सुरीर क्षेत्र में कई सालों से अलग-अलग गावों के लोग इस धंधे में लिप्त हैं। सुरीर में बारूद भंडारण से हुए विस्फोट के बाद इस खेल में लिप्त लोगों ने पकड़े जाने के डर से पटाखे और अन्य सामग्री पोखर में फेंके। वहीं पटाखों से भरा पीतल का बर्तन पोखर में मिला। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने उसे कब्जे में लिया है।
प्रशासन से नहीं मिली कोई मदद
कस्बा सुरीर में शनिवार की सुबह हुए विस्फोट में पड़ोसियों के क्षतिग्रस्त हुए मकानों की प्रशासन द्वारा कोई सुध नहीं ली है। जिससे ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। पड़ोसी ज्वाला सिंह के दो कमरे पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए। जबकि दो कमरों में दरार आ गई है।
उसका कहना है कि रात को बच्चे घर में नहीं सोते हैं। पड़ोसी कैलाशी का कहना है कि कमरे पर टिनशेड पड़ा था। उसी में रहकर गुजर-बसर कर रहे थे। वह भी पूरी तरह से नष्ट होने से खुले आसमान में रहने को मजबूर हैं। पड़ोसी बॉबी जोशी अस्पताल में भर्ती है।
उसकी पुत्री रुचि व पुत्र चिराग का कहना है कि पापा ही घर का खर्च चलाते थे और घर भी विस्फोट में धराशाई हो गया। उधर पड़ोसी महेंद्र का कहना है कि किराए के घर में रहकर मजदूरी कर बच्चों का पेट पालन कर रहे थे। वह भी बारूद भंडारण विस्फोट में तहस-नहस हो गया। पीड़ितों ने शीघ्र मुआवजा दिलाए जाने की मांग की है।