कर्नल (रिटायर्ड) जीएम खान ने कहा कि जैसे जल, थल और वायु के लिए अलग अलग सेना हैं, वैसे ही अब समय आ गया है कि पर्वतीय क्षेत्रों के लिए सेना की स्पेशल कोर हो। माउंटेन स्ट्राइक कोर गठित की जानी चाहिए जो पर्वतीय क्षेत्रों में ही तैनात रहे। ऐसे मौकों पर वो बेहद कारगर होगी जब पर्वतीय क्षेत्र में दुश्मन से मुकाबला करना होगा।
उन्होंने कहा कि हमारी सेना रणनीति में, साहस में, युद्ध के अनुभव में चीन से आगे है। 1962 में भी हमारी सेना ने बहादुरी दिखाई। अगर हमारे पास बेहतर संसाधन होते तो नतीजा कुछ और होता। चीन के लिए अलग से रणनीति तैयार करने का समय आ गया है।
'कूटनीतिक स्तर पर भी किए जाएं प्रयास'
स्क्वैड्रन लीडर (रिटायर्ड) एके सिंह ने कहा कि हमारे सैनिक शहीद हुए, यह बहुत दुखद है। वीर जवानों ने दुश्मन के दांत खट्टे किए, चीन के सैनिक भी हताहत हुए हैं। चीन पर पूरे देश में गुस्सा है, लेकिन यह ऐसा वक्त है जब संयम और धैर्य की भी जरूरत है।
हमें कूटनीतिक स्तर पर प्रयास जारी रखने चाहिए। युद्ध के बाद भी नतीजा बातचीत से ही निकलता है। यह ऐसा वक्त है जब न चीन युद्ध की स्थिति में है और न ही भारत। हमें ऐसा रास्ता निकालना चाहिए जिससे कड़ा संदेश भी जाए और देश युद्ध से बच जाए।
कर्नल ( रिटायर्ड ) एसके भाटिया ने कहा कि चीन ने यह हरकत पहली बार नहीं की है। हमारी जमीन पर आना, कब्जे की कोशिश करना, टेंट लगाना ... चीन की सेना यह लंबे समय से कर रही है। अब वक्त आ गया है जब चीन को सबक सिखाया जाए। अब तीन मोर्चे खुल गए हैं।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान पहले से शत्रु है, चीन धोखेबाज है, मुंह में राम, बगल में छुरी वाली कहानी है। नेपाल को भी उसने भड़का कर तीसरा मोर्चा बनाया है। हमें तीनों पर जूझना है। अगर चीन को सबक सिखा दिया तो पाकिस्तान और नेपाल को भी कड़ा संदेश मिल जाएगा। सैनिकों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। बदला कैसे लेना है, कब लेना है, यह सरकार और भारतीय सेना तय करे।
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