-सुबह 9 से रात 11 बजे तक काम कर रहे बैंककर्मियों की दिनचर्या बदली -अनिद्रा-चिड़चिड़ेपन के हुए शिकार,
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8 नवंबर की रात 12 बजे से 500 और एक हजार रुपये के नोट बंद करने के फैसले ने लोगों की तो नींद उड़ा ही दी, नोट बदलने के काम में लगे बैंक कर्मियों के दिन का चैन और रात की नींद भी हराम हो गई। आठ घंटे तक एयरकंडीशन बैंक में काम करने वाले कर्मचारियों को अब 12 से 14 घंटे तक काम करना पड़ रहा है। पहले से 10 गुना ज्यादा पब्लिक डीलिंग में जुटे बैंककर्मियों को अनिद्रा, चिड़चिड़ापन और सिरदर्द जैसी समस्याएं शुरू हो गई हैं। नींद पूरी न होने और थकान से कई बैंककर्मी नींद में भी नोट बदलने से जुड़े शब्द बड़बड़ाते दिख रहे हैं।
बैंक की लंबी कतारें, नोट बदलवाने से लेकर जमा करने वालों का सैलाब। जनसमुदाय के साथ डीलिंग। बैंककर्मियों के लिए डिमोनेटाइजेशन की यह प्रक्रिया पहला अनुभव है। सप्ताह भर से बदली दिनचर्या में काम करने वाले बैंक कर्मियों के सामने अब स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें आने लगी हैं।
सुबह 7 बजे जागने से लेकर रात 12 बजे सोने तक वह नोट और इनकी दिक्कतों से ही जुड़े हैं। सुबह 9 बजे बैंक पहुंचने की मजबूरी और रात 11 बजे तक काम की व्यस्तता से वह परेशान हो चुके हैं। हाल ये है कि 6 बजे लोगों के जाने के बाद भी नोटों का मिलान, पांच सौ-एक हजार रुपये के नोटों का डिटेल रिपोर्ट तैयार करने में पसीना छूट रहा है। काम के दबाव में बैंकर्स में अनिंद्रा, चिड़चिड़ापन, सिर दर्द, गुस्सा आने की समस्यायें बढ़ी हैं।
एसएन मेडिकल कालेज के मनोरोग विभागाध्यक्ष डा. विशाल सिन्हा बताते हैं कि समय के अभाव में बैंकर्स डाक्टर के पास नहीं आ पा रहे, लेकिन फोन पर कई बैंकर्स ने इस तरह की समस्या बताई है। ऐसी दिक्कतें शार्ट टर्म होती हैं, अत्यधिक कार्य करने, पर्याप्त नींद न आने, शोरगुल में रहने से परेशानी पैदा होती है।
यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन के अध्यक्ष एमएम राय के मुताबिक बैंकर पूरे दिन इस काम में तन, मन से जुटे हैं। हर तरह के लोगों को संभालने का यह पहला अनुभव है। दिक्कतें हैं, लेकिन सभी मिलजुल कर एक टीम की तरह से इस संकट को खत्म करने में लगे हैं।