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Agra News: स्तन-बगल की गांठ में नहीं होता दर्द तो भी कैंसर की संभावना

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आगरा। स्तन-बगल और छाती की हड्डी में गांठ है, लेकिन इसमें दर्द नहीं होता है तो भी कैंसर का खतरा हो सकता है। महिलाएं इसे नजरअंदाज न करें। शुरुआती स्टेज में गांठ में दर्द नहीं होता। तीसरी-चौथी स्टेज आने पर इनमें दर्द होने लगता है। ऐसे में गांठ होने पर तत्काल चिकित्सक को दिखाएं। यह कहना है एसएन मेडिकल कॉलेज के कैंसर रोग विभाग की पूर्व अध्यक्ष डॉ. सुरभि गुप्ता का।
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उन्होंने कहा कि कैंसर पीड़ित महिलाओं में 30 फीसदी मामले स्तन कैंसर के मिल रहे हैं। एसएन की ओपीडी में हर सप्ताह 5-7 नई मरीज आ रही हैं। इनमें 35 से 45 साल की महिलाओं की संख्या ज्यादा बढ़ रही है। 20-25 साल पहले ये बीमारी सबसे ज्यादा 50-60 उम्र की महिलाओं में मिलती थी। इसकी सबसे बड़ी वजह जेनेटिक, देर से शादी और देर से बच्चे करना, फास्ट फूड-डिब्बा बंद भोजन, मोटापा, बढ़ता प्रदूषण है।

उन्होंने कहा कि कैंसर की स्क्रीनिंग करना आसान है। 20 साल की उम्र से युवती दर्पण के आगे खड़ा होकर तीन अंगुलियों से स्तन, बगल में जांच करें। इनमें गांठ महसूस हो रही है और वह हिल-डुल नहीं रही और दर्द भी नहीं हो रहा है, लेकिन समय के साथ गांठ का आकार बढ़ रहा है तो ये कैंसर की गांठ हो सकती है। तत्काल चिकित्सक के पास जाकर जांच कराएं। जिन महिलाओं के परिवार में कैंसर की हिस्ट्री है तो वह 30 साल की उम्र के बाद और अन्य महिलाएं 40 साल की उम्र के बाद एक-दो साल में मेमोग्राफी जरूर कराएं।
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30-40 उम्र की महिलाओं में ज्यादा हो रही सर्जरी
एसएन मेडिकल कॉलेज के कैंसर सर्जन डॉ. वरुण अग्रवाल ने बताया कि महीने में 4-5 मरीजों के स्तन कैंसर की सर्जरी कर रहे हैं। इसमें 70 फीसदी महिलाओं की उम्र 30-40 साल है। 90 फीसदी महिलाएं एडवांस स्टेज पर ही आती हैं। शुरू में ही लक्षण दिखने पर इसका इलाज करा लिया जाए तो सर्जरी से बचा जा सकता है। व्यायाम, पौष्टिक भोजन और सही उम्र में विवाह और बच्चे होने से स्तन कैंसर के खतरे से बचा जा सकता है।
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ये होते हैं स्तन कैंसर के लक्षण
- स्तन की त्वचा में संतरे के छिलके जैसे गड्ढे पड़ जाना।
- स्तन के आकार में अंतर होना, त्वचा लाल हो जाना।
- निपल अंदर धंस जाना, खून या फिर मवाद आना।
- निपल पर घाव होना, ठीक नहीं होना, खुजली होना।

कुरुक्षेत्र। हरियाणवी लोक गायन कार्यक्रम में प्रस्तुति देते रामकेश जीवनपुरिया। विज्ञप्ति

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