एटा में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हुई है, जिसमें कोतवाली देहात पुलिस व भाजपा नेताओं की किरकिरी हो रही है। पोस्ट में लिखा गया है कि बाइक चोरी के मामले में 13 व्यक्तियों को पुलिस ने पकड़ा। 10 लोगों को 1.22 लाख रुपये लेकर छोड़ा गया, जबकि भाजपा नेताओं की सिफारिश वाले एक व्यक्ति को पुलिस ने नहीं छोड़ा।
कोतवाली देहात पुलिस ने 2 अगस्त को ऑटो लिफ्टर गैंग का खुलासा किया था। तीन लोग पकड़े, जिनसे 12 चोरी की बाइकें बरामद दिखाईं। इस मामले में पहले ही दिन से राजनीतिक दखल शुरू हो गया। बताया जा रहा था कि पुलिस ने एक-एक कर कई लोगों को संदेह के आधार पर उठा लिया। बृहस्पतिवार को सोशल मीडिया पर माफ करना भतीजे आपको बचा नहीं सके हैशटैग के साथ पोस्ट की गई, जिसमें लिखा है कि कोतवाली देहात पुलिस ने बाइक चोरी में पहले एक व्यक्ति उठाया। उसके कहने पर 12 अन्य लोग उठाए।
मारहरा विधायक के कहने पर भी जब मिरहची क्षेत्र के लोगों को नहीं छोड़ा गया तो लेनदेन की बात हुई। 10 लोगों से 30 से 50 हजार तक रुपये लेकर छोड़ दिया गया। थाने में मारहरा ब्लॉक प्रमुख, एक जिला पंचायत सदस्य व एक अन्य भाजपा नेता के पहुंचने का जिक्र किया गया है। पोस्ट में लिखा है कि एक निर्दोष को छोड़ने की सिफारिश पुलिस ने नहीं मानी। यह भी लिखा गया है कि नेताओं ने डीआईजी तक शिकायत की। इस पर इंस्पेक्टर द्वारा माफी मांगकर पैसा वापस करा दिया गया। इस पोस्ट पर तमाम लोग प्रतिक्रियाएं लिख रहे हैं।
ये बोले विधायक
इस मामले में मारहरा विधायक वीरेंद्र सिंह लोधी ने कहा कि 'पोस्ट मेरे द्वारा नहीं देखी गई है। कुछ लोगों ने इस बारे में जानकारी दी है। पोस्ट करने वाले ही इस बारे में बता सकते हैं। मेरे संज्ञान में ऐसा कुछ नहीं है। डीआईजी से शिष्टाचार मुलाकात की थी।' वहीं मारहरा ब्लॉक प्रमुख रवि वर्मा ने कहा कि 'माननीय के कहने पर मामला खत्म हो गया है। हम उनसे ऊपर नहीं हो सकते हैं। जब परेशानियां बढ़ती हैं तो व्यक्ति कुछ न कुछ तो करता ही है।'
जांच जारी है
एसएसपी उदय शंकर सिंह ने बताया कि 'पकड़े गए सदस्यों में एक आरोपी को छुड़ाने के लिए कुछ लोग प्रयासरत थे। संभवत: उनके द्वारा ही ऐसा दुष्प्रचार किया जा रहा है। वायरल पोस्ट के आधार पर सीओ सिटी ने पीड़ितों से पूछताछ की है, जिसमें ऐसी किसी बात की पुष्टि नहीं हुई है, जांच जारी है।'