यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा एटा के जेल रोड निवासी अभिषेक कुशवाह मंगलवार को वापस घर आ गया। उसने बताया कि किराये के फ्लैट में चार छात्र रहते थे। 24 फरवरी को रूस का हमला होने के बाद पानी की आपूर्ति आना बंद हो गई। बाजार में भी पांच-पांच लीटर की पानी की दो बोतलें मिलीं। इनसे चारों ने बहुत मुश्किल से छह दिन काटे। यह भी बताया कि एक दिन ट्रेन पकड़ने के लिए पांच किमी तक दौड़े, लेकिन उसमें सवार यूक्रेनियन ने उन्हें नहीं चढ़ने दिया। निधौली रोड निवासी छात्र अभिषेक शाक्य भी घर पहुंच गया है।
अभिषेक कुशवाह यूक्रेन के डेनिप्रो शहर में रहकर मेडिकल की पढ़ाई कर रहा था। वह तीसरे वर्ष में है। अभिषेक ने बताया कि 24 फरवरी से माहौल अस्थिर होने लगा था। हॉस्टल से कुछ दूरी पर दो धमाके हुए थे, जिससे सभी छात्र काफी डर गए थे। हालांकि इसके बाद डेनिप्रो में कोई धमाका नहीं हुआ। लेकिन पास के शहर खारकीव में लगातार धमाके हो रहे थे। जिसके चलते खतरा बना हुआ था। प्रशासन हवाई हमलों के मद्देनजर सायरन बजाता था। जिसके बजते ही सभी को बंकर में जाना पड़ता था।
अभिषेक ने बताया कि आठ छात्रों ने पोलैंड बॉर्डर पहुंचने की योजना बनाई। जिसके लिए ल्वीव जाना होता है। वहां की ट्रेन पकड़ने के लिए रेलवे स्टेशन पहुंचे। लेकिन ट्रेन में पहले से भीड़ थी और उसमें सवार यूक्रेन नागरिक चाकू लिए हुए गेट पर ही खड़े थे, जो हम लोगों को नहीं चढ़ने दे रहे थे। इससे ट्रेन छूट गई। फिर भी हम लोग उसके पीछे भागते रहे। करीब पांच किमी तक दौड़ते रहे। बाद में हिम्मत टूट गई और वापस लौट गए। रात होने की वजह से खाना भी नहीं मिला और भूखे सोना पड़ा।