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एटा के छात्र की आपबीती: पांच किमी दौड़े, फिर भी यूक्रेनियन ने ट्रेन में नहीं चढ़ने दिया, चाकू दिखाकर डराया

Tue, 08 Mar 2022 05:37 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, एटा

सार

यूक्रेन से लौटे एटा के मेडिकल छात्र अभिषेक कुशवाह ने बताया कि एक दिन ट्रेन पकड़ने के लिए पांच किमी तक दौड़े, लेकिन उसमें सवार यूक्रेनियन ने उन्हें नहीं चढ़ने दिया। इसके बाद वह अपने दोस्तों के साथ बस से रोमानिया बॉर्डर पहुंचा, तब घर आ पाया। 
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यूक्रेन में युद्ध की वजह से लोग पलायन करने को मजबूर हैं। - फोटो : PTI
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विस्तार
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यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा एटा के जेल रोड निवासी अभिषेक कुशवाह मंगलवार को वापस घर आ गया। उसने बताया कि किराये के फ्लैट में चार छात्र रहते थे। 24 फरवरी को रूस का हमला होने के बाद पानी की आपूर्ति आना बंद हो गई। बाजार में भी पांच-पांच लीटर की पानी की दो बोतलें मिलीं। इनसे चारों ने बहुत मुश्किल से छह दिन काटे। यह भी बताया कि एक दिन ट्रेन पकड़ने के लिए पांच किमी तक दौड़े, लेकिन उसमें सवार यूक्रेनियन ने उन्हें नहीं चढ़ने दिया। निधौली रोड निवासी छात्र अभिषेक शाक्य भी घर पहुंच गया है। 

हॉस्टल के कुछ दूरी पर हुए थे धमाके  

अभिषेक कुशवाह यूक्रेन के डेनिप्रो शहर में रहकर मेडिकल की पढ़ाई कर रहा था। वह तीसरे वर्ष में है। अभिषेक ने बताया कि 24 फरवरी से माहौल अस्थिर होने लगा था। हॉस्टल से कुछ दूरी पर दो धमाके हुए थे, जिससे सभी छात्र काफी डर गए थे। हालांकि इसके बाद डेनिप्रो में कोई धमाका नहीं हुआ। लेकिन पास के शहर खारकीव में लगातार धमाके हो रहे थे। जिसके चलते खतरा बना हुआ था। प्रशासन हवाई हमलों के मद्देनजर सायरन बजाता था। जिसके बजते ही सभी को बंकर में जाना पड़ता था। 

एक रात भूखे सोना पड़ा 

अभिषेक ने बताया कि आठ छात्रों ने पोलैंड बॉर्डर पहुंचने की योजना बनाई। जिसके लिए ल्वीव जाना होता है। वहां की ट्रेन पकड़ने के लिए रेलवे स्टेशन पहुंचे। लेकिन ट्रेन में पहले से भीड़ थी और उसमें सवार यूक्रेन नागरिक चाकू लिए हुए गेट पर ही खड़े थे, जो हम लोगों को नहीं चढ़ने दे रहे थे। इससे ट्रेन छूट गई। फिर भी हम लोग उसके पीछे भागते रहे। करीब पांच किमी तक दौड़ते रहे। बाद में हिम्मत टूट गई और वापस लौट गए। रात होने की वजह से खाना भी नहीं मिला और भूखे सोना पड़ा। 

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बस से पहुंचे रोमानिया बॉर्डर 

छात्र ने बताया कि एक मार्च को बस से रोमानिया बॉर्डर पहुंचे। यहां चेकिंग के दौरान करीब चार घंटे का वक्त बहुत भारी पड़ा। माइनस सात डिग्री तापमान में खुले में खड़ा रहना पड़ा था। रोमानिया में प्रवेश मिलने के बाद वहां भारतीय दूतावास और गैर सरकारी संगठनों की ओर से बढ़िया इंतजाम किए गए थे। सोमवार रात करीब 9.30 बजे दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचे। यहां से मामा कार द्वारा लेने के लिए गए थे। मंगलवार तड़के 3 बजे एटा पहुंच गए। 

अभिषेक शाक्य भी घर लौटा 

निधौली रोड निवासी अभिषेक शाक्य ने बताया कि वह भी डेनिप्रो में ही पढ़ रहे हैं। हालात खराब होने के बाद रोमानिया पहुंच गए थे। फ्लाइट मिलने पर सोमवार रात दिल्ली पहुंचे। एटा से पिता नरेंद्र सिंह शाक्य और भाई मेजर डॉ. आशीष शाक्य लेने के लिए पहुंचे। नरेंद्र शाक्य ने बताया कि कुछ जरूरी काम से यहां रुके हुए हैं। शाम के समय एटा के लिए निकलेंगे।
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