आगरा में पुलिस उपायुक्त नगर सोनम कुमार ने बृहस्पतिवार को थाना रकाबगंज की बालूगंज पुलिस चाैकी को निलंबित कर दिया। इनमें चाैकी प्रभारी सहित चार दरोगा और चार सिपाही शामिल हैं। इस कार्रवाई की वजह लापरवाही बताई गई है। हालांकि, चर्चा लूट की घटना के गलत तरीके से खुलासे की है। पुलिसकर्मियों ने पुलिस आयुक्त आवास के पास साइकिल सवार से मोबाइल लूटने वाले दो बदमाशों को सेटिंग करके पकड़ते हुए खुलासा किया था। इस खेल की जानकारी अधिकारियों को हो गई। इस पर पूरी चाैकी पर गाज गिर गई। विभागीय जांच के आदेश भी दिए गए हैं।
घटना 23 जुलाई की है। जंगजीत नगर, सदर निवासी राकेश मथुरिया साइकिल से घर जा रहे थे। पुलिस आयुक्त आवास से आगे माल रोड के मोड़ के पास बाइक पर तीन बदमाश आए। राकेश की जेब से मोबाइल लूटकर फरार हो गए। थाना रकाबगंज में केस दर्ज किया गया। अगले ही दिन पुलिस की ओर से जानकारी दी गई कि घटना को अंजाम देने वाले गिरफ्तार कर लिए गए हैं।
घटना सादान उर्फ फैज, केशव और साहिल ने की थी। वह ताजगंज क्षेत्र के रहने वाले हैं। इनमें से फैज और केश को गिरफ्तार दिखाया। साहिल को वांछित दर्शाया गया। पकड़े गए आरोपियों से लूट का मोबाइल और घटना में प्रयुक्त बाइक बरामद दिखाई गई थी।
सवाल खड़े होने पर अधिकारियों ने की कार्रवाई
मगर इस खुलासे पर सवाल खड़े हो गए। इसके बाद ही यह कार्रवाई मानी जा रही है। बृहस्पतिवार को एडीसीपी सिटी आदित्य सिंह ने वायरलेस सेट पर मैसेज दिया। इसमें पूरी बालूगंज पुलिस चाैकी को निलंबित करने की जानकारी दी गई। इस बारे में डीसीपी सिटी सोनम कुमार ने खुलकर नहीं बताया। कहा कि विभागीय कार्यों में लापरवाही बरतने पर एडीसीपी ने कार्रवाई की है।
सवाल : आरोपी पुलिस के पास खुद कैसे पहुंचे
चर्चा है कि लूट की वारदात को अंजाम देने वालों को सेटिंग से पकड़ा गया था। इसके लिए एक मध्यस्थ की मदद ली गई। कहा गया था कि मुठभेड़ नहीं दिखाई जाएगी। किसी के पैर में गोली नहीं लगेगी। अधिकारियों तक यह जानकारी पहुंच गई। मामले को गंभीरता से लिया गया। यदि पुलिस के पास बदमाश खुद चलकर पहुंचे तो बिना किसी तरह की धमकी के नहीं आ सकते थे। पुलिस के खुलासे पर सवाल खड़े होने पर तत्काल कार्रवाई की गई।
इन पर गिरी गाज
जिन पुलिसकर्मियों पर गाज गिरी, उनमें बालूगंज चाैकी प्रभारी एसआई अमित कुमार, एसआई राहुल गिरी, एसआई अंकित, एसआई विनय धारा, मुख्य आरक्षी धर्मेँद्र कुमार, आलोक कुमार, सिपाही विकास यादव और मोहम्मद आमिर आलम शामिल हैं।
पहले भी पुलिसकर्मियों पर हो चुकी है कार्रवाई
यह कोई पहला मामला नहीं है, जब पुलिसकर्मियों पर गाज गिरी। पिछले साल लापरवाही पर 50 से अधिक पुलिसकर्मियों पर गाज गिरी थी। उनके कार्य में लापरवाही मिलने पर निलंबन की कार्रवाई की गई थी। पुलिस आयुक्त के फीडबैक सेल में लापरवाही सामने आने के बाद कार्रवाई हुई थी।