जमीन पर कब्जों को लेकर जयगुरुदेव आश्रम खूब चर्चा में रहा है। सरकारी जमीन को भी कब्जा लिया था। अपनी जमीन को मुक्त कराने के लिए यूपीएसआईडीसी को लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी। अदालत की शरण ली तब कहीं जाकर जमीन वापस मिलती नजर आ रही है। वरना अफसरों ने तो कभी सुनवाई ही नहीं की। शासन से लेकर प्रशासन तक खामोश रहे।
यूपीएसआईडीसी की तेरह हेक्टेयर से भी अधिक भूमि मानी जा रही है। इस जमीन को खाली कराने के लिए अफसर लखनऊ तक दौड़े, लेकिन हर बार कब्जे की फाइल को रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया। यूपीएसआईडीसी के अफसरों ने कई दफा जमीन की नापतोल कराने के लिए अफसरों से मदद मांगी, लेकिन कोई तैयार ही नहीं हुआ।
लिहाजा विभाग को अदालत की शरण में जाना पड़ा। पिछले दिनों अदालत ने प्रशासन को आदेश दिए थे कि जयगुरुदेव आश्रम ने कितनी जमीन कब्जा रखी है इसका सेटेलाइट सर्वे कराया जाए। प्रशासन ने तीन दिनों तक सेटेलाइट सर्वे कराया था। करीब तेरह हेक्टेयर भूमि ऐसी आई जिसे यूपीसीआईडीसी का बताया गया।
जिलाधिकारी अरविंद मलप्पा बंगारी ने बताया कि 13 हेक्टेयर भूमि सेटेलाइट सर्वे में सामने आई थी। वहीं प्राधिकरण में भी मामले चल रहे हैं। आश्रम में होने वाले निर्माण पर प्राधिकरण ने आपत्ति भी लगाई थी, लेकिन फिर भी काम होता चला गया।