मैनपुरी। सरकार ने नई पेंशन योजना की जगह पर एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) का निर्णय लिया है। लेकिन कर्मचारी इस योजना से संतुष्ट नहीं है। जिले के शिक्षक और कर्मचारियों ने सरकार की इस नई पेंशन योजना को स्वीकार करने से मना कर दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी ओपीएस को लेकर लड़ाई जारी रहेगी।
लंबे समय से शिक्षक और कर्मचारी नवीन पेंशन योजना (एनपीएस) की जगह पर पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सरकार ने बीच का रास्ता निकालते हुए अब एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) को लागू करने का निर्णय लिया है। लेकिन शिक्षक और कर्मचारी सरकार की इस पेंशन योजना से भी संतुष्ट नहीं हैं। पुरानी पेंशन की लड़ाई लड़ रहे जिले के शिक्षक और कर्मचारी नेताओं का कहना है कि उन्हें ओपीएस की स्वीकार है।
यूपीएस में कुछ खास बदलाव नहीं है। यह एनपीएस की तरह से ही है। देश और प्रदेश का कर्मचारी इसे स्वीकार नहीं करेगा। इसमें जीपीएफ की व्यवस्था नहीं की गई है। सरकार को चाहिए कि जल्द पुरानी पेंशन योजना को ही लागू किया जाए।
राजीव यादव, जिलाध्यक्ष प्राथमिक शिक्षक संघ
सरकार का यूपीएस का निर्णय स्वागत योग्य है लेकिन इसे कर्मचारी और शिक्षक स्वीकार नहीं करेंगे। सरकार पुरानी पेंशन योजना के लगभग नजदीक पहुंच गई है। सरकार से अपील है कि जल्द पुरानी पेंशन योजना को लोगू किया जाए।
गोविंद पांडेय, जिलाध्यक्ष पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ
यूपीएस में सरकार ने जीपीएफ और मृतक आश्रित की नौकरी के संबंध में जो बदलाव किए हैं उन्हें स्वीकार नहीं किया जाएगा। पुरानी पेंशन की लड़ाई अटेवा ने जो शुरू की थी उसके लगभग नजदीक पहुंच गया है। सरकार से अपील है ओपीएस को लागू करे।
जितेंद्र सिंह, जिलाध्यक्ष अटेवा
सरकार लगभग पुरानी पेंशन के नजदीक पहुंच गई है। ऐसे में शिक्षक और कर्मचारियों से अपील है कि वे यूपीएस को स्वीकार न करें। यूपीस भी एनपीएस की तरह धोखा है। शिक्षक और कर्मचारी ओपीएस के अतिरिक्त कुछ भी स्वीकार नहीं करेंगे।
शशिकांत दीक्षित, जिला महामंत्री अटेवा