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सरकार का विरोध करने पर भुगती यातनाएं

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24एमएनपी-22-सुमंत गुप्ता - फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। इमरजेंसी में सरकार का विरोध करने पर लोगों ने जेल में ब्रिटिश शासन की तरह ही यातनाएं झेली हैं। इमरजेंसी की याद करके आज भी लोगों की रूह कांप जाती है। जेल की यातनाएं झेल चुके लोगों की आंखों में इमरजेंसी की बात करते ही दहशत नजर आने लगती है।
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पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 की रात देश में इमरजेंसी घोषित कर दी। कांग्रेस विरोधी दलों के नेताओं को पुलिस ने रात में सोते समय घरों से उठाकर जेल में डाल दिया। जेल गए लोग सरकार की दमनकारी नीतियों को याद करके आज भी सिहर जाते हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी के सत्ता में सीधे हस्तक्षेप के बाद देश में इमरजेंसी लगी। कांग्रेस विरोधी नेताओं की धरपकड़ की गई। रात में सोते समय घरों से उनको उठाकर पुलिस ने अपराधियों जैसा व्यवहार किया।
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सुमंत कुमार गुप्ता, अध्यक्ष वैश्य एकता परिषद
1975 में देश में लगाई गई इमरजेंसी अंग्रेजी शासन से कम नहीं थी। सरकार का विरोध करना उस समय सबसे बड़ा अपराध था। प्रदेश में भी कांग्रेस की सरकार होने के कारण पुलिस सत्ता के इशारे पर दमन कर रही थी।
सतीशचंद्र अवस्थी, अध्यक्ष लोकतंत्र सेनानी परिषद
कांग्रेस के विरोधी नेताओं की पुलिस ने रातोंरात सूची तो बना ली लेकिन अधिकांश नेताओं को पुलिस नहीं पहचानती थी। ऐसे नेता आसानी से घरों से गायब होकर लोगों को सरकार विरोधी गतिविधियों में प्रेरित करने में सक्रिय रहे।
मथुरा प्रसाद राजपूत, लोकतंत्र सेनानी
इमरजेंसी में सरकार विरोधी नेताओं के घरों पर पुलिस और पीएसी अपराधियों की तरह दबिश देती थी। सरकार की दमनकारी नीतियों से ही 1977 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा।
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कैलाशचंद्र राजपूत, लोकतंत्र सेनानी
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