उसका नाम वायु (हाथी) था, लेकिन अपनी जिंदगी के 51वें वर्ष तक वह गुलामी की जंजीरों में रहा। उसके शरीर पर वर्षों के शोषण और उपेक्षा के गहरे जख्म थे। भारी लकड़ियां ढोने के क्रूर काम और लगातार प्रताड़ना ने उसके बाएं पैर को हमेशा के लिए खराब कर दिया था। 52 साल की उम्र में उसे कैद से मुक्त कर हाथी पुनर्वास केंद्र और अस्पताल लाया गया। जहां लगातार एक साल के इलाज के बाद अब धीरे-धीरे वह फिर से सामान्य जीवन बिताने लगा है। उसे 2000 किलो मीटर दूर स्थित उत्तर पूर्व के राज्य से चुरमुरा स्थित केंद्र में लाया गया था।
उत्तर-पूर्व के जंगलों से जब 53 वर्षीय 'वायु' को वाइल्डलाइफ एसओएस के मथुरा केंद्र लाया गया था, तो हड्डियां गलत तरीके से जुड़ने के कारण उसकी कोहनी का जोड़ पत्थर जैसा सख्त हो गया था। वायु के लिए हर कदम एक ऐसी सजा थी, जिसमें शारीरिक के साथ मानसिक चोटों का दर्द भी शामिल था। पिछले एक साल से, वाइल्डलाइफ एसओएस की टीम वायु के लिए एक ढाल बनकर खड़ी है।
उसे सामान्य जीवन देने के लिए टीम हर दिन नए प्रयास करती है। पैरों की जकड़न कम करने के लिए उसे हाइड्रोथेरेपी और फिजियोथेरेपी दी गई तो उसके नाजुक तलवों और नाखूनों की विशेष देखभाल ने उसे फिर से चलने का साहस दिया। वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक कार्तिक सत्यनारायण कहते हैं कि अब वायु की आंखों में अब डर की जगह देखभाल करने वालों के प्रति भरोसा नजर आता है।
सचिव गीता शेषमणि और चिकित्सा सेवाओं के प्रमुख बैजूराज एमवी बताते हैं कि वायु के केंद्र में एक साल पूरे होने की खुशी में टीम ने उसके लिए एक शानदार ''''फ्रूट दावत'''' का आयोजन किया। ताजे केले, पपीते और तरबूजों से सजी यह दावत सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि उस सम्मान और प्यार का प्रतीक थी, जिससे उसे वर्षों तक महरूम रखा गया था।