प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्मार्ट सिटी योजना के दूसरे चरण में आगरा को शामिल किया था। सितंबर 2016 को आगरा के नाम एलान हुआ था लेकिन आठ महीने में यह योजना कागजों से आगे नहीं बढ़ पाई है। पहले विधानसभा के चुनाव के चलते गतिरोध पैदा हुआ था तो अब नगर निगम के चुनाव ने योजना को प्रभावित किया है। हालांकि नगर निगम चुनाव की आचार संहिता इस योजना पर प्रभावी नहीं होगी।
गौरतलब है कि आगरा को दूसरे चरण में 21 सितंबर 2016 में स्मार्ट सिटी योजना में शामिल किया गया था। इसी के तहत स्वच्छता सर्वे भी कराया गया था। पहले स्वच्छता सर्वे में आगरा को 45 वां स्थापना मिला था। दूसरे चरण में आगरा की स्थिति में सुधार हुआ लेकिन स्मार्ट सिटी योजना पर केवल कागजी घोड़े दौड़ते रहे। स्थिति यह है कि अभी तक कंसलटेंट फर्म का चुनाव भी आगरा स्मार्ट सिटी लिमिटेड नहीं कर पाई है। कंपनी की पहली बैठक तक आगरा में नहीं हो सकी है। एक बैठक दिल्ली में हुई थी, जिसमें यूपी सरकार के प्रतिनिधि शामिल नहीं हुए थे। नगर आयुक्त और आगरा स्मार्ट सिटी लिमिटेड के सीईओ इंद्र विक्रम सिंह का कहना है कि नगर निगम चुनाव योजना के कार्यों को प्रभावित नहीं करेगा लेकिन मैनपावर न होने के चलते परेशानी हो रही है। 25 अप्रैल को दिल्ली में बैठक बुलाई गई लेकिन यहां निगम चुनाव की प्रक्र्रिया चल रही है, ऐसे में बैठक में कैसे भाग लें।
अब तक यह हुआ है काम
- आगरा स्मार्ट सिटी लिमिटेड का गठन।
- स्पेशल परपज व्हीकल का गठन किया।
- स्मार्ट सिटी लिमिटेड का बैंक एकाउंट।
- पीएमसी के चयन की लिए टेंडर।
स्मार्ट सिटी योजना के तहत ये होने हैं काम
- एरिया वेस्ड मैनेजमेंट: इसमें शहर के किसी एक हिस्से का चयन कर उसका संपूर्ण विकास किया जाना है।
- हेरिटेज डेवलपमेंट: स्मार्ट सिटी योजना के तहत आगरा में हेरिटेज डेवलपमेंट का कार्य भी करना है।
- ट्रैफिक मैनेजमेंट: पर्यटन नगरी आगरा में ट्रैफिक मैनेजमेंट का किया जाना है, इसमें इलेक्ट्रानिक सर्विलांस होगी।
- सालिड वेस्ट मैनेजमेंट और पेयजल मैनेजमेंट पर भी कार्य किया जाएगा स्मार्ट सिटी योजना में।