भदावर के बाह, इटावा, भिंड, मुरैना की है उन्नतशील नस्ल
छोटे आकार और कम चारा खाने से है पशुपालकों की पहली पसंद
बाह। प्राचीन भदावर राज्य के बाह, इटावा, भिंड, मुरैना में पाई जाने वाली भदावरी भैंस लुप्त होने की कगार पर है। छोटे आकार और कम चारा खाने वाली भदावरी भैंस के दूध में घी सबसे ज्यादा होता है। भदावरी भैंस की नस्ल को बचाने के प्रयास हो रहे हैं।
पशु पालन विशेषज्ञ डाॅ. राजेश पाराशर ने बताया कि राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो करनाल में भदावरी सांड़ का जर्म प्लाज्म सुरक्षित किया गया है। सांड़ का सीमन तैयार कर भदावरी भैंस को संरक्षित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि भदावरी भैंस दिन में 7-8 लीटर दूध देती है। भैंस की इस नस्ल के दूध में सबसे ज्यादा बसा (घी) 12-14 प्रतिशत होती है। जबकि दूसरी नस्ल की भैंसों में 7-8 प्रतिशत होती है। आकार छोटा होने और कम चारा खाने की बजह से भदावरी भैंस पशुपालकों की पहली पसंद रही है। उन्होंने बताया कि प्राचीन भदावर राज्य के बाह, इटावा, भिंड, मुरैना में पाई जाने वाली भैंस की नस्ल का नाम भदावरी पड़ा है।
ऐसी होती है भदावरी नस्ल की भैंस- भदावरी भैंस मध्यम आकार की भूरे या काले रंग की होती हैं, इनकी गर्दन के निचले हिस्से पर दो सफ़ेद रेखाएं होती हैं, जो इन भैंसों की एक अलग विशेषता है। सींग थोड़े बाहर की ओर मुड़े हुए होते हैं। गर्दन के समानांतर और सिरे ऊपर की ओर मुड़े हुए होते हैं।