78 साल में ब्लैकबोर्ड से AI तक पहुंची पढ़ाई
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बीते 78 वर्षों में शिक्षा व्यवस्था ने पारंपरिक ढांचे से निकलकर स्मार्ट क्लास, डिजिटल प्लेटफॉर्म और एआई आधारित प्रणाली तक लंबा सफर तय किया है। आज तकनीक के विस्तार से शिक्षा न केवल सुलभ हुई है, बल्कि गुणवत्ता, पारदर्शिता और पहुंच में भी बड़ा बदलाव आया है। स्वतंत्रता के शुरुआती दौर में शिक्षा सीमित संसाधनों पर आधारित थी। स्कूलों की संख्या कम थी और पढ़ाई चॉक-ब्लैकबोर्ड व पुस्तकों तक सीमित रहती थी। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच कमजोर थी और तकनीकी साधनों का अभाव था।
संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. मुकेश अग्रवाल ने बताया कि अब शिक्षा पूरी तरह तकनीक आधारित हो चुकी है। स्मार्ट बोर्ड, डिजिटल क्लासरूम और एआई टूल्स ने पढ़ाई को इंटरएक्टिव और प्रभावी बना दिया है, जिससे छात्र अपनी क्षमता के अनुसार सीख पा रहे हैं।
जिला विद्यालय निरीक्षक चंद्रशेखर ने बताया कि जनपद के 40 राजकीय स्कूलों में स्मार्ट क्लास संचालित हो रही हैं, सभी में प्रोजेक्टर लगाए गए हैं तथा 16 स्कूलों में वाई-फाई की सुविधा उपलब्ध है। आगामी सत्र में अन्य विद्यालयों में भी इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही कई स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा के कोर्स लागू किए गए हैं, जिनमें छात्रों को ऑनलाइन माध्यम से प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
बीएसए जितेंद्र कुमार गोंड के अनुसार समग्र शिक्षा एवं पीएम श्री योजना के तहत 427 परिषदीय विद्यालयों में स्मार्ट बोर्ड स्थापित किए गए हैं और 56 विद्यालयों में आईसीटी लैब बनाई गई हैं, जहां 2 से 12 तक कंप्यूटर उपलब्ध कराए गए हैं। लगभग 580 शिक्षकों को डिजिटल प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिससे परिषदीय स्कूलों के छात्र भी आधुनिक शिक्षा से जुड़ रहे हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक ने बताया कि यूट्यूब जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म और एआई आधारित लर्निंग से अब शिक्षा कहीं भी, कभी भी संभव हो गई है, जिससे छात्रों को सीधा लाभ मिल रहा है।
पहले शिक्षा का माध्यम केवल कक्षा और किताबों तक सीमित था, जहां छात्रों को शिक्षक पर पूरी तरह निर्भर रहना पड़ता था। कठिन विषयों को समझने के लिए सीमित संसाधन होते थे और बार-बार दोहराने की सुविधा भी नहीं मिलती थी। अब यूट्यूब ने इस व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया है। छात्र किसी भी विषय को वीडियो के माध्यम से बार-बार देख सकते हैं, जिससे जटिल टॉपिक भी आसानी से समझ में आ जाते हैं।
एनिमेशन, ग्राफिक्स और लाइव उदाहरणों के जरिए पढ़ाई अधिक रोचक और प्रभावी हो गई है। सीबीएसई के डिप्टी कोऑर्डिनेटर रामानंद चौहान ने बताया कि यूट्यूब ने ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के छात्रों को भी गुणवत्ता वाली शिक्षा से जोड़ा है। अब महंगे कोचिंग संस्थानों पर निर्भरता कम हुई है और छात्र घर बैठे ही देश-विदेश के शिक्षकों से सीख पा रहे हैं। इसके अलावा, परीक्षा की तैयारी, प्रतियोगी परीक्षाओं के टिप्स और स्किल-बेस्ड लर्निंग के लिए भी यूट्यूब एक बड़ा माध्यम बन गया है। डिजिटल युग में यूट्यूब ने शिक्षा को सुलभ बनाने में अहम भूमिका निभाई है।
पारंपरिक पढ़ाई से प्रोफेशनल कोर्स की ओर रुझान, बदलती शिक्षा की नई तस्वीर
शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जहां पहले छात्र पारंपरिक विषयों को प्राथमिकता देते थे, वहीं अब रोजगारपरक और प्रोफेशनल कोर्स की ओर झुकाव तेजी से बढ़ा है। यह बदलाव समय की जरूरत और बाजार की मांग दोनों को दर्शाता है। कुछ दशक पहले तक शिक्षा का मुख्य आधार पारंपरिक कोर्स जैसे बीए, बीएससी और एमए हुआ करते थे। इन कोर्सों में सैद्धांतिक ज्ञान अधिक होता था और रोजगार के अवसर सीमित रहते थे। छात्र इन्हें केवल डिग्री प्राप्त करने के उद्देश्य से चुनते थे, जिससे करिअर की दिशा अक्सर स्पष्ट नहीं होती थी।
मौजूदा समय में यह परिदृश्य तेजी से बदला है। अब छात्र इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, मेडिकल, आईटी, पैरामेडिकल, डिप्लोमा और स्किल-बेस्ड कोर्स की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं। इन कोर्सों का फोकस सीधे रोजगार और व्यावहारिक ज्ञान पर होता है, जिससे पढ़ाई के बाद नौकरी की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, डिजिटल शिक्षा, इंडस्ट्री की बढ़ती मांग और तकनीकी विकास ने इस बदलाव को गति दी है। आज छात्र केवल डिग्री नहीं, बल्कि करिअर और स्किल को प्राथमिकता दे रहे हैं। यही कारण है कि प्रोफेशनल कोर्स का दायरा लगातार बढ़ रहा है और पारंपरिक कोर्स का आकर्षण धीरे-धीरे कम हो रहा है।