मनी लॉन्ड्रिंग और जालसाजी के गंभीर आरोपों में घिरे अंसल प्रॉपर्टीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड पर कानून का शिकंजा कस गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आगरा में अंसल ग्रुप की 598 करोड़ की भूमि को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है। जांच में सामने आया है कि बिल्डर ने न केवल हजारों निवेशकों, बल्कि आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) के साथ भी बड़ी धोखाधड़ी की है।
ईडी की यह कार्रवाई गुरुग्राम में हुए बहुचर्चित भूमि अधिग्रहण घोटाले से जुड़ी है। जांच के अनुसार, कंपनी ने वहां सरकार द्वारा अधिसूचित भूमि को लेकर धोखाधड़ी की थी। चूंकि घोटाले से संबंधित मूल भूमि बेची जा चुकी थी, इसलिए ईडी ने उसकी भरपाई के लिए आगरा के अटूस और पनवारी गांवों में स्थित अंसल की वैकल्पिक संपत्तियों को कुर्क किया है।
ईडी से पहले आगरा विकास प्राधिकरण ने भी अंसल ग्रुप की घेराबंदी की थी। सुशांत ताज सिटी प्रोजेक्ट के विकास शुल्क के बदले अंसल ने जो जमीन एडीए के पास बंधक रखी थी, उसमें से 100 एकड़ जमीन कंपनी ने अवैध रूप से अन्य लोगों को बेच दी। इस धोखाधड़ी के मामले में एडीए द्वारा अंसल एपीआई के खिलाफ पहले ही प्राथमिकी दर्ज कराई जा चुकी है।
हजारों निवेशकों का भविष्य अधर में
पनवारी गांव में 477 एकड़ में फैला सुशांत ताज सिटी प्रोजेक्ट वर्ष 2017 तक पूरा होना था। करीब 9 साल बीत जाने के बाद भी यह प्रोजेक्ट अधूरा है, जिससे हजारों निवेशकों की जीवन भर की कमाई फंसी हुई है। कार्रवाई से बचने के लिए बिल्डर ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में दिवालिया घोषित होने की याचिका दायर की थी। हालांकि, एडीए उपाध्यक्ष एम. अरुन्मौली ने बताया कि जनवरी के आदेश के तहत कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया को केवल लखनऊ और राजस्थान के प्रोजेक्ट्स तक सीमित कर दिया गया है। आगरा और नोएडा के प्रोजेक्ट्स को फिलहाल इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया है, ताकि स्थानीय स्तर पर संपत्तियों की कुर्की और निवेशकों को राहत देने की कार्रवाई जारी रह सके।