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UP: कीठम का इको सेंसिटिव जोन...एनजीटी की फटकार के बाद राज्य सरकार ने बदला रुख

Thu, 22 May 2025 09:46 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

 सूर सरोवर पक्षी विहार का इको सेंसिटिव जोन शून्य करने पर एनजीटी ने सवाल उठाए थे। अब एनजीटी की फटकार के बाद राज्य सरकार ने रुख बदल लिया है। 
 
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इको सेंसिटिव जोन - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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एनजीटी की फटकार के बाद राज्य सरकार ने सूर सरोवर पक्षी विहार, कीठम के इको सेंसिटिव जोन मामले में अपना रुख बदल दिया है। बीते साल सूर सरोवर पक्षी विहार में 380.558 हेक्टेयर क्षेत्र जोड़ने की अधिसूचना में इसे शून्य कर दिया गया था।
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एनजीटी के सवाल उठाने के बाद राज्य सरकार ने बुधवार को अपने हलफनामे में कहा है कि सीमा विस्तार होने यानी धारा 26 ए की कार्रवाई पूरी होने के बाद ही इको सेंसिटिव जोन का दायरा तय किया जाएगा।

 
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सूर सरोवर पक्षी विहार, कीठम की पुरानी 403.09 हेक्टेयर की सीमा पर 10 अक्तूबर 2019 को इको सेंसिटिव जोन एक किमी तय किया गया था। इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी गई, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सीमा विस्तार की प्रक्रिया शुरू हुई तो बीते साल दिसंबर में राज्य सरकार ने 403 हेक्टेयर में 380.558 हेक्टेयर का सूरदास वन ब्लॉक जोड़ दिया, लेकिन इको सेंसिटिव जोन शून्य कर दिया।

 

इस पर याचिकाकर्ता डॉ. शरद गुप्ता ने आपत्ति जताई। एनजीटी ने फरवरी में हुई सुनवाई में राज्य सरकार के अधिकार पर ही सवाल उठा दिए थे। एनजीटी ने कहा था कि पर्यावरण मंत्रालय अधिसूचना जारी कर सकता है। राज्य सरकार केवल सिफारिश कर सकती है। अब बुधवार को चीफ कंजरवेटर एन रवींद्र के हलफनामे में कहा गया है कि डीएम की अध्यक्षता वाली कमेटी ने तय किया है कि अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद ही इको सेंसिटिव जोन तय किया जाएगा। इसके लिए प्रक्रिया शुरू करने पर सहमति बनी।


 

हमारी सांसों के लिए जरूरी है विस्तार
34 साल पहले वर्ष 1991 में कीठम झील और इसके आसपास के 403.09 हेक्टेयर क्षेेत्र को पर्यावरण मंत्रालय ने सूर सरोवर पक्षी विहार, कीठम नाम से सेंक्चुअरी के रूप में संरक्षित किया। इसमें कीठम झील का आकार 300 हेक्टेयर था। 92.49 हेक्टेयर क्षेत्र का वन क्षेत्र और 310.60 हेक्टेयर राजकीय भूमि शामिल की गई थी।

 
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इस पक्षी विहार में 222 प्रजातियों के पक्षी, 229 प्रजातियों के पौधे, कछुए की 7 प्रजातियां, सांपों की 15 प्रजातियां, नौ प्रकार के स्तनधारी व कई अन्य जीव-जंतु हैं। भालू संरक्षण केंद्र के साथ पानी का इतना बड़ा जलाशय कहीं नहीं है। पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता के मुताबिक हमारी जैव विविधता को समृृद्ध करने और प्रदूषण नियंत्रण के लिए कीठम के जंगल का दायरा बढ़ाना जरूरी है।
 
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