आगरा। मनरेगा के जॉबकार्ड धारकों की ई-केवाईसी प्रक्रिया चल रही है। इससे मजदूरों को डिजिटल पहचान मिलेगी साथ ही फोटो का गलत इस्तेमाल कर मजदूरी में फर्जीवाड़ा करने वालों पर रोक लग जाएगी। जिले में करीब 58 फीसदी जॉबकार्ड धारक ई-केवाईसी प्रक्रिया पूर्ण करा चुके है। इसके मार्च तक 100 फीसदी करने का लक्ष्य है। इसके बाद निष्क्रिय कार्ड धारक स्वयं ही समाप्त हो जाएंगे। एप मजदूरों की पहचान आंख की रेटिना से करेगा।
मनरेगा उपायुक्त रामायण सिंह यादव ने बताया कि इस व्यवस्था से जॉब कार्ड धारकों की कार्यस्थल की उपस्थिति और पारदर्शी हो जाएगी। उनकी मजदूरी में गड़बड़ी नहीं होगी। सक्रिय जॉबकार्ड धारकों के कार्यस्थल पर मजदूरी के फोटो एप पर अपलोड करने के बाद आधार से मिलान होगा। मजदूर की आंख की रेटिना से पहचान कर फाइनल उपस्थिति दर्ज करेगा। ऐसे में किसी अन्य का फोटो अपलोड कर फर्जीवाड़ा करने की गुंजाइश पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। एक ही कार्यस्थल की मजदूरी के फोटो को दोबारा अपलोड करने पर एप स्वयं निरस्त कर देगा।
रामायण सिंह यादव ने बताया कि शासन के निर्देश पर जॉब कार्डधारकों की ई केवाईसी कराई जा रही है। अभी तक जिले में 1,62,188 श्रमिकों की ई-केवाईसी का कार्य पूरा हो गया है। यह कुल जॉब कार्ड धारकों का 57़ 56 फीसदी है। इसमें जैतपुर कलां ब्लाॅक 67़ 13 फीसदी ई-केवाईसी कर जिले में पहले नंबर पर है। वहीं फतेहपुर सीकरी 42़ 24 फीसदी श्रमिकों की ई-केवाईसी करने पर सबसे निचले स्तर पर है।