बढ़ते प्रदूषण ने अस्थमा और सांस रोगियों के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है। हवा में धूल-धुआं के चलते अस्थमा अटैक के मरीज डेढ़ गुना बढ़ गए हैं। सोमवार को भी अस्थमा अटैक के पांच मरीज भर्ती हुए। 15 दिनों में 80 से अधिक मरीज भर्ती हुए हैं। इससे एसएन कॉलेज के वक्ष एवं क्षय रोग विभाग का वार्ड फुल हो गया है।
विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि सोमवार को ओपीडी में 289 मरीज आए। इसमें 66 पुराने और 223 नए रहे। नए मरीजों ने नाक की एलर्जी, सांस लेने में परेशानी और जकड़न बताई। पुराने मरीजों ने तेज खांसी, बलगम में खून आना, सीने में घर्र-घर्र की आवाज आने की शिकायत की।
कई मरीजों को सांस लेने में दिक्कत होने से उन्हें भर्ती कर ऑक्सीजन दी जा रही है। 55 बेड का वार्ड फुल होने पर 10 अतिरिक्त बेड लगाए गए हैं। इमरजेंसी में भी अस्थमा अटैक के पांच मरीज भर्ती हुए हैं। इनमें दो की हालत गंभीर है।
क्षय रोग विभाग के डाॅ. गजेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि जाम लगने से वाहनों से धुआं अधिक निकलता है। इससे कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोआक्साइड, सल्फर डाई आक्साइड समेत कई अन्य खतरनाक गैसों की मात्रा बढ़ गई है। निर्माण कार्य होने और बदले मौसम के कारण स्मॉग भी बढ़ गया है।
ऐसे में 100 से 200 एक्यूआई होने पर टीबी, सांस और अस्थमा रोगियों के लिए परेशानी बढ़ने लगती है। 200 से 300 एक्यूआई होने पर स्वस्थ लोगों में भी अस्थमा पनपने का खतरा बढ़ जाता है। इसके चलते ओपीडी में नए के साथ टीबी, अस्थमा और सांस के पुराने रोगियों की परेशानी बढ़ गई है। ओपीडी में आने वाले मरीजों की दवाओं की डोज बढ़ानी पड़ रही है।
पर्चा, दवा के लिए मारामारी
एसएन और जिला अस्पताल की ओपीडी में सोमवार को भारी भीड़ रही। एसएन में 3501 और जिला अस्पताल में 3455 मरीज आए। दोनों के ओपीडी हॉल ठसाठस भर गया। पर्चा, दवा और जांच के लिए मारामारी-धक्कामुक्की झेलनी पड़ी। पर्चा बनवाने के बाद डॉक्टर को दिखाने और दवा लेने के लिए लंबी कतार में लगना पड़ा। तीन घंटे से अधिक समय में मरीजों को इलाज मिल पाया। कुबेरपुर निवासी दिनेश यादव ने बताया कि मां को गठिया का तेज दर्द है। साढ़े तीन घंटे का समय लग गया।
प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि अन्य दिनों के मुकाबले सोमवार को डेढ़ गुना तक मरीज आते हैं। ऑनलाइन काउंटर बढ़वाने के साथ व्यवस्था करने के लिए गार्ड भी लगाए हैं।
इन बातों का रखें ध्यान
- निर्माण कार्य के दौरान स्थल को पर्दे से ढकवाएं, छिड़काव करवाएं।
- यातायात व्यवस्था दुरुस्त कराएं, जिससे सड़कों पर जाम कम लगे।
- कम दूरी और घने बाजार में जाने के लिए वाहनों के उपयोग से बचें।
- कचरा न जलाएं, सुबह-शाम घर के दरवाजा-खिड़की बंद रखें।
- प्रदूषित स्थानों पर जाने से बचें, घर से बाहर जाते वक्त मास्क लगाएं।
- गर्म पानी की भाप लें, गुनगुना पानी पीएं, डॉक्टर से दवाएं व्यवस्थित कराएं।
इनमें आए सबसे ज्यादा मरीज
मेडिसिन- 719
हड्डी रोग- 365
त्वचा रोग- 328
वक्ष एवं क्षय रोग- 289
स्त्री रोग विभाग- 219