आगरा में चंबल नदी में पानी का संकट गहरा गया है। यह संकट न केवल पेयजल से जुड़ा है, बल्कि देश की एकमात्र घड़ियाल सेंक्चुरी से भी जुड़ा है।
नदी में पानी की कमी के कारण घड़ियालों पर संकट खड़ा हो गया है। बाह में कई गांवों से गुजरती चंबल नदी में पानी केवल दो से चार फुट तक रह गया है।
डीएफओ चंबल ने नदी में पानी छुड़वाने के लिए कोटा बैराज को पत्र लिखा है।चंबल नदी में बीते साल तक 1681 घड़ियाल और 615 मगरमच्छ पाए गए।
कम पानी हाेने से जलजीव परेश्ाान
इस साल की गणना की रिपोर्ट अभी आनी बाकी है। तीन दशकों में यह पहला मौका है, जब चंबल नदी में पानी केवल दो फुट तक रह गया हो।
चंबल की पहचान तेज बहाव वाली और हमेशा स्वच्छ पानी से भरी रहने वाली नदी की है। घड़ियाल सेंक्चुरी में पानी की कमी के कारण इन पर संकट खड़ा हो गया है।
रेत और पानी कम होने से घड़ियालों की भीड़ एक जगह होगी, जिससे भोजन का संकट खड़ा हो जाएगा। नदी के कई जगह सूखने से प्राकृतिक प्रवास स्थल में बदलाव आएगा।
डाल्फिन पर भी संकट
जलजीव
- फोटो : अमर उजाला
घड़ियालों के अलावा स्वच्छ जल में पाई जाने वाली डाल्फिन पर भी संकट खड़ा हो गया है। डाल्फिन को तैरने के लिए ज्यादा पानी की जरूरत है।
चंबल नदी में मध्य प्रदेश और राजस्थान ने कई पेयजल परियोजनाएं बना ली हैं। पिछले दस सालों में राजस्थान ने धौलपुर, कोटा और इसके बीच में चार बड़ी पेयजल परियोजनाओं को शुरू किया है।
जिनसे हजारों गांव तक पानी पाइप लाइन के जरिए पहुंचाया जा रहा है। इसी तरह मध्य प्रदेश ने भी पेयजल योजनाओं को शुरू किया है। हर दिन लाखों गैलन पानी चंबल से निकाला जा रहा है।
चंलब के डीएफओ आनंद कुमार ने बताय कि चंबल नदी में पानी कम होने के कारण घड़ियालों पर असर पड़ सकता है, इसे देखते हुए कोटा बैराज से पानी छोड़ने के लिए पत्र भेजा है।