अमृतसर पुलिस ने थाना कत्थूनंगल क्षेत्र से तीन नशा तस्करों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से तीन लाख 46 हजार नशीली गोलियां बरामद कीं हैं। जिसकी कीमत 40 लाख बताई जा रही है। आरोपियों से दो गाड़ियां भी बरामद की गई हैं। ये सिंथेटिक ड्रग आगरा और दिल्ली में तैयार की जा रही थी। इन्हें आगरा गैंग बना रहा था।
गिरफ्तार तस्करों के नाम नवजोत सिंह, जलप्रीत सिंह है, जबकि तीसरे आरोपी का नाम बताने से एसपी ने इनकार कर दिया। तीनों तस्कर नशे की गोलियां पूरे पंजाब में सप्लाई करते थे। पुलिस जिला देहाती के एसपी गौरव तुरा ने मीडिया को बताया कि चेकिंग के दौरान पुलिस ने बस को रोका। इसमें तस्कर मिले। तलाशी में उनके कब्जे से छह प्लास्टिक की बोरियों में भरीं नशीली गोलियां बरामद कीं।
एसपी के अनुसार तीनों तस्करों के खिलाफ पहले से थाना कत्थूनंगल में एक एफआईआर दर्ज है। पूछताछ में पुलिस को जानकारी मिली है कि आरोपी तस्कर मुख्यतौर पर अमृतसर, गुरदासपुर, बटाला व पठानकोट के आसपास सिंथेटिक ड्रग की सप्लाई करते थे।
पंजाब पुलिस ने आगरा गैंग की 12 फर्मों के रिकॉर्ड जब्त किए
पंजाब पुलिस ने नशे की दवाओं के कारोबार करने वाले आगरा गैंग की 12 फर्म के रिकॉर्ड जब्त किए हैं। पंजाब पुलिस ने औषधि विभाग कार्यालय में छह घंटे तक रिकॉर्ड खंगाले हैं। इन फर्म के लाइसेंस, संचालक समेत अन्य जानकारी करते हुए रिकॉर्ड की सत्यापित कॉपी जब्त की है।
पंजाब पुलिस की टीम ने औषधि विभाग में छह घंटे तक खंगाले रिकॉर्ड
पंजाब पुलिस की दो सदस्यीय टीम मंगलवार सुबह आगरा पहुंची। टीम ने बताया कि आगरा गैंग के सरगना जितेंद्र अरोड़ा और कपिल अरोड़ा के गैंग से नशीली दवाओं के मामले के तार जुड़े हैं। इसमें 12 फर्म के नाम सामने आए हैं। इन्हीं फर्म से पंजाब में नशे की दवाओं की सप्लाई गई है। पंजाब पुलिस की टीम इन फर्म के नाम लेकर थाना कोतवाली पहुंची। यहां से औषधि विभाग के कार्यालय गई और वहां इन फर्म के लाइसेंस निकलवाए। करीब छह घंटे में इन फर्म के लाइसेंस, लाइसेंस धारक का नाम, पता, लाइसेंस कब हुआ है, किस औषधि निरीक्षक ने लाइसेंस जारी किया, ये तमाम जानकारियां जुटाईं। सभी दस्तावेजों पर विभाग की सत्यापित कराते हुए जब्त किया।
जांच के वक्त बंद करवा दिए थे मोबाइल
पंजाब पुलिस की टीम ने आगरा गैंग से जुड़ी फर्म की जानकारी करने के लिए पूछताछ के वक्त संबंधित के फोन बंद करा दिए थे। औषधि विभाग में पूछताछ के वक्त भी कर्मचारी और औषधि निरीक्षक को फोन नहीं करने दिया। इसके बाद पंजाब पुलिस टीम थाना कोतवाली भी पहुंची। यहां 12 फर्म के संचालकों के आपराधिक रिकॉर्ड के बारे में भी जानकारी की है।