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'आगरा गैंग' की जड़ें नहीं खोद सके ड्रग अफसर, तीन साल से नशे के कारोबार में सक्रिय है दवा माफिया

Sat, 01 Aug 2020 04:21 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

  • तीन साल से कर रहा है नशे का कारोबार
  • पिता के नाम से खोल रखी थी फर्म
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गिरफ्तार किए गए दवा कारोबारी जितेंद्र उर्फ विक्की अरोड़ा और कपिल अरोड़ा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दवा माफिया जितेंद्र अरोड़ा उर्फ विक्की और उसके भाई कपिल अरोड़ा की 26 जुलाई को पंजाब में हुई गिरफ्तारी के बाद पांच दिन में आगरा के ड्रग अफसर उसकी सिर्फ एक फर्म का पता लगा पाए हैं। यह उनके पिता रमेश अरोड़ा के नाम से है। इसका भी लाइसेंस अब तक निरस्त नहीं किया गया है। आगरा के ड्रग विभाग ने इस रैकेट के किसी सदस्य को अब तक नहीं पकड़ा है।
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इनके पिता के नाम से चल रही फर्म का नाम कृष्ण एजेंसी है। 2017 में इसका लाइसेंस जारी हुआ था। इसी लाइसेंस पर नशे की दवाइयों की तस्करी की जा रही थी। पंजाब पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया।

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उसका अवैध गोदाम मिला। गोदाम से नशे की दवाइयां बरामद हो गईं। गोदाम में कुल 15 करोड़ की दवाइयां मिलीं। यह भी पता चला कि वह फर्जी बिलिंग कर रहा था। यह किन फर्म के नाम से हो रही थी, कुछ पता नहीं चल पाया है। तीन साल से यह कारोबार चल रहा था। 

दवा माफिया विक्की अरोड़ा का गोदाम - फोटो : अमर उजाला
ढिलाई पर उठ रहे सवाल
1. पांच दिन में यह क्यों पता नहीं किया गया कि दवा माफिया-किस फर्म के फर्जी बिल लगाकर नशे की दवा की तस्करी कर रहे थे।
2. इसकी जानकारी क्यों नहीं की गई कि आगरा गैंग शहर में कौन-कौन से मेडिकल स्टोर पर दवाओं की सप्लाई कर रहा था।
3. दवा माफिया का 11 राज्यों में नेटवर्क है, इसमें जुड़े आगरा के अन्य लोगों के नाम अब तक सामने क्यों नहीं आए।
4. वह फर्जी बिलिंग का टैक्स भी जमा कर रहा था, जीएसटी विभाग से इसकी जानकारी क्यों नहीं ली गई।
5. अब तक सारी कार्रवाई पंजाब पुलिस ने की है, दवा माफिया की करतूतों का आगरा ड्रग विभाग को तीन साल में कैसे पता नहीं चला।

जीएसटी विभाग से मांगी है जानकारी
जांच में अरोड़ा बंधु की एक फर्म कृष्णा एजेंसी का पंजीकरण मिला है। इसका लाइसेंस उनके पिता रमेश अरोड़ा के नाम से है। बाकी और भी फर्म होंगी, जिनके रिकॉर्ड पंजाब पुलिस लेकर गई है। जांच चल रही है। जीएसटी विभाग से भी इसकी फर्म की खरीद-बिक्री की जानकारी मांगी है। - राजकुमार शर्मा, ड्रग इंस्पेक्टर

जांच करा रहे हैं, लाइसेंस निरस्त होंगे
दवा माफिया अरोड़ा बंधु की फर्म के लाइसेंस निरस्त किए जाएंगे। उन्हें नोटिस रिसीव कराने के बाद प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इनके नशे की दवा के कारोबार की जांच की जा रही है। मथुरा से भी इसके तार जुड़े होने पर जांच करा रहे हैं। - अखिलेश जैन, सहायक आयुक्त औषधि

कार्रवाई : मथुरा गैंग के भी तीन लोग किए जा चुके गिरफ्तार
नशे के कारोबार में आगरा गैंग के तार मथुरा से भी जुड़े हुए हैं। ड्रग इंस्पेक्टर ने बताया कि मथुरा के तीन लोगों को पंजाब पुलिस गिरफ्तार करके ले जा चुकी है। दवा माफिया अरोड़ा बंधु मथुरा के गैैंग से मिलकर पंजाब समेत अन्य राज्यों में दवाओं की सप्लाई करते थे। इसके बाद मथुरा ड्रग विभाग ने भी इसकी जांच शुरू कर दी है।

दरअसल, पंजाब पुलिस ने नशे की दवाएं मिलने के बाद आगरा और मथुरा के दवा माफिया का खुलासा किया था। पंजाब पुलिस की गिरफ्त में सबसे पहले हरीश भाटिया आया, जिसे पश्चिमी बंगाल से पकड़ा था। उसी से पूछताछ में आगरा और मथुरा गैंग सामने आया।

फर्जीवाड़ा : जय हनुमान फार्मा के नहीं मिले रिकॉर्ड
नशे के कारोबार में संजय प्लेस की जय हनुमान फार्मा का नाम भी शामिल है। पंजाब पुलिस के निर्देश पर इसके गोदाम पर छापा मारा था, लेकिन यह खाली मिला। गोदाम के मालिक राजपुर चुंगी निवासी मयंक जैन ने इसे पीपलमंडी निवासी लाखन सिंह के नाम पर किराए पर उठाने की बात कही थी। इस पर ड्रग विभाग ने इसका लाइसेंस निरस्त करने के बाद रिकॉर्ड खंगाले, लेकिन अभी तक इसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। 
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मांग : अधिकारियों की मिलीभगत से नशे का कारोबार, सीबीआई करे जांच
जिला आगरा केमिस्ट एसोसिएशन ने कलक्ट्रेट में प्रदर्शन करते हुए नशे और नकली दवाओं के कारोबार की सीबीआई जांच कराने की मांग की। पदाधिकरियों ने ड्रग विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से नशे का कारोबार संचालित करने का आरोप लगाया। उन्होंने डीएम की अनुपस्थिति में एसीएम चतुर्थ को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

जिलाध्यक्ष आशू शर्मा ने कहा कि सिकंदरा स्थित दवा विक्रेता हरीबाबू से ड्रग इंस्पेक्टर राजकुमार शर्मा और बृजेश यादव ने 35 लाख रुपये रिश्वत के मांगे। इनका ऑडियो-वीडियो भी वायरल हुआ था, डीएम ने जांच कराई, लेकिन इसे दबा दिया गया।

नशे का पूरा कारोबार ऐसे ही भ्रष्ट अफसरों की मिलीभगत से चल रहा है। मुख्यमंत्री से मांग है कि भ्रष्ट अफसरों को हटाते हुए सीबीआई जांच कराई जाए। प्रदर्शन में उपाध्यक्ष रामअवतार शर्मा, राजेश सक्सेना, दिनेश सेन, कपूरचंद राहुल, दिनेश कुमार, लक्ष्मण धाकड़, सत्यप्रकाश रहे।
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