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Agra News: फर्जी मेडिकल प्रमाणपत्र लगाकर नहीं बनवा सकेंगे ड्राइविंग लाइसेंस, सॉफ्टवेयर में हुआ बदलाव

Fri, 02 Sep 2022 01:51 PM IST
धीरेन्द्र सिंह धर्मेंद्र यादव, आगरा

सार

आरटीओ प्रमोद कुमार सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार ड्राइविंग लाइसेंस की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने में लगी है। इसी के तहत अब मेडिकल सर्टिफिकेट भी चिकित्सक ही अपलोड कर सकेंगे।
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संभागीय परिवहन कार्यालय आगरा
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विस्तार
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ड्राइविंग लाइसेंस की प्रक्रिया को पारदर्शी और दलालों के चंगुल से मुक्त कराने की कवायद करने में कड़ी में नया बदलाव हुआ है। फर्जी मेडिकल प्रमाणपत्र के लगाकर लाइसेंस बनवाना अब आसान नहीं होगा। डॉक्टर अपनी आईडी से आवेदक का मेडिकल खुद ही अपलोड करेंगे। आवेदक अपने स्तर से मेडिकल प्रमाणपत्र जमा नहीं करा सकेगा। 

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आरटीओ में अभी तक ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए 40 वर्ष से अधिक आयु के आवेदकों को मेडिकल सर्टिफिकेट लगाना होता है। भारी वाहनों के डीएल, नवीनीकरण, अंतरराष्ट्रीय लाइसेंस, विकलांगता के आवेदकों को भी सर्टिफिकेट लगाना अनिवार्य है। ऐसे में अभी तक आरटीओ के सामने ही मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाकर आवेदनपत्र के साथ लगाकर जमा कर दिए जाते थे। इसके अलावा फेसलेस लाइसेंस में भी स्कैन कॉपी लगाई जा रही थी। 

अब परिवहन विभाग ने मेडिकल बोर्ड के चिकित्सकों को सारथी सॉफ्टवेयर से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की है। इसमें चिकित्सक आवेदक का मेडिकल टेस्ट लेने के बाद उसकी रिपोर्ट अपनी ही आईडी से सॉफ्टवेयर पर अपलोड करेंगे। इससे गड़बड़ी की कोई आशंका नहीं रहेगी। 
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आरटीओ प्रमोद कुमार सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार ड्राइविंग लाइसेंस की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने में लगी है। इसी के तहत अब मेडिकल सर्टिफिकेट भी चिकित्सक ही अपलोड कर सकेंगे। इससे फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट की आशंका खत्म हो जाएगी। आईडी भी तैयार हो चुकी है। इटावा में यह प्रक्रिया शुरू भी हो चुकी है। 

दिव्यांगों ने बनवा लिए थे लर्निंग लाइसेंस

फेसलेस ड्राइविंग लाइसेंस की प्रक्रिया में पिछले दिनों आरटीओ में कई मामले ऐसे पकड़े गए थे, जिनमें दिव्यांगों ने अपने लाइसेंस बनवा लिए थे, लेकिन स्थायी के लिए आवेदन करने आने पर मामले पकड़े गए। ऐसे पांच लाइसेंस निरस्त किए गए थे। अमर उजाला ने पड़ताल में इसका खुलासा किया था। 

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