आगरा का इस्लाम नगर पिछले 30 वर्षों से पानी के संकट से जूझ रहा है। हैंडपंप तो दूर यहां सबमर्सिबल पंप तक नहीं हैं। गर्मी के मौसम में पानी के लिए त्राहि त्राहि मच जाती है। यमुना का किनारा होने के बाद भी पानी खारा है। यहां दिन निकलते ही लोग पानी को लेकर निजी टैंकरों के इतंजार में घर के गेट पर खड़े हो जाते हैं। यहां के लोगों का कहना है कि पानी की समस्या के चलते रिश्तेदार अपनी बेटियों का रिश्ता तक करने को तैयार नहीं है।
निजी टैकरों से खरीदते हैं पानी
- फोटो : अमर उजाला
आगरा-अलीगढ़ रोड पर सड़क किनारे को छोड़ दिया जाए तो इस्लाम नगर के अंदर कॉलोनियों में पानी का संकट बना हुआ है। कहने के लिए जीवनी मंडी वाटरवर्क्स हर रोज 190 एमएलडी पानी की सप्लाई शहर में कर रहा है। इसके बाजवदू इस्माल नगर में पानी नहीं पहुंच पा रहा है। यहां पानी की किल्लत है।
निजी टैकरों से पानी लेते स्थानीय लोग
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मोहम्मद उस्मान, शरीफ, अशफाक अली, नूरबानो आदि का कहना है कि उन्हें यहां 30 वर्ष से अधिक का समय हो गया है। कुछ साल पहले यहां पाइप लाइन तो डाली गई थी। मगर पानी घरों में आज तक नहीं पहुंचा। गर्मी तो दूर यहां सर्दी में भी पानी की सप्लाई नहीं हो पाती है जिसके चलते रिश्तेदार हमारे बच्चों से रिश्ते करने को तैयार नहीं हैं। यह समस्या यहां घर घर में बनी हुई है।
इस्लामनगर के निवासी
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इस्लामनगर की परवीन ने बताया कि मेरी शादी को 15 वर्ष हो गए हैं। पहले दिन से लेकर आज तक यहां पानी नहीं आया है। अफसाना बेगम ने कहा कि पानी की समस्या को लेकर लड़कों के रिश्ते नहीं हो रहे हैं। कई बार रिश्तेदार प्यासे लौट जाते हैं।
पीने का पानी लेकर जाती महिला
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शबानी बेगम ने कहा कि रोजमर्रा के काम के लिए टैंकर से पानी लेते हैं। पीने के लिए फिल्टर का पानी खरीदकर लाते हैं। इसरार अली बताते हैं कि हर माह पांच से छह हजार रुपए पानी पर खर्च हो जाते हैं। घर का एक सदस्य तो सिर्फ पानी के लिए कमाता है। फूलबानो ने बताया कि घर में हैंडपंप लगवाया था। जिसका पानी इतना खारा था कि कपड़े धुलना तो दूर बर्तनं में छेद हो जाते हैं।