एटा जिले में गर्मी के साथ पेयजल संकट भी बढ़ता जा रहा है। जिले के तमाम ग्राम पंचायतों में लगाई गईं पेयजल परियोजनाएं बंद पड़ी हैं। कहीं पाइपलाइन टूटने, तो कहीं ऑपरेटर की तैनाती न होने से लोगों को पेयजल नहीं मिल पा रहा है। ओवरहैड टैंक सफेद हाथी बने हुए हैं। आचार संहिता के पेंच में लोगों की प्यास फंस गई है।
जिले की ग्राम पंचायतों में पेयजल आपूर्ति के लिए कुछ साल पहले ग्रामीण पाइप्ड पेयजल परियोजनाएं शुरू की गई थीं। गांवों में ओवरहैड टैंक के साथ पाइप लाइन के जरिए पानी की आपूर्ति देने की व्यवस्था की गई, मगर परियोजनाएं संसाधनों के अभाव में अधर में लटकी रहीं।
अब गर्मियों में फिर से ग्रामीणों को पानी की चिंता सताने लगी है। जिले में 20 से अधिक ग्राम पंचायतों में पेयजल परियोजनाओं का बुरा हाल है। कहीं ऑपरेटर तैनात नहीं है, तो कहीं पाइप लाइन टूटी पड़ी है। कई ग्राम पंचायतों में परियोजना के ओवरहैड टैंक रिबोर होने हैं।
मौजूदा दौर में चुनाव आचार संहिता के चलते पेयजल परियोजनाओं को दुरुस्त करने का काम अटका हुआ है। लोगों की दिक्कत बढ़ती जा रही है। सीडीओ ने सभी ग्राम पंचायतों में 30 मई तक पेयजल परियोजनाओं को दुरुस्त कर चालू करने के निर्देश दिए हैं।