पंचायत चुनाव लड़ने के लिए लंबे समय से प्रयास कर रहे थे। कुछ के सपने तो आरक्षण ने चूर कर दिए तो कुछ सहकारी बैंकों के कर्ज के बोझ तले दबकर मजबूर दिखाई दे रहे हैं। हालांकि कुछ संभावित प्रत्याशी तो कर्ज जमाकर नो ड्यूज पाने में लगे हुए हैं, जबकि कुछ बेबस दिखाई दे रहे हैं। जो अब चुनाव में कम ही दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
पंचायत चुनाव लड़ने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं कि चुनाव वही व्यक्ति लड़ सकेगा जो सहकारी समितियों और सहकारी बैंकों का कर्जदार नहीं होगा। प्रत्येक दावेदार को अपने नामांकन पत्र के साथ सहकारी बैंकों का नो ड्यूज लगाना भी अनिवार्य होगा। बिना नो ड्यूज के नामांकन रद्द कर दिया जाएगा। डीएम सीपी सिंह ने सभी दावेदारों को स्पष्ट कर दिया है कि वे बैंकों का बकाया चुकाकर नो ड्यूज अवश्य लगाएं।
ऐसे में अब पंचायत चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों में से तमाम संभावित प्रत्याशी ऐसे हैं जो सहकारी बैंकों के लाखों रुपये के कर्जदार हैं। उन्हें चिंता सता रही है कि वे कर्ज कैसे चुकाएंगे। कर्ज भी चुकाना है और चुनाव में खर्चा भी करना है। कुछ संभावित प्रत्याशियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अब तो मैदान में उतरने की उम्मीद कम है। पहले तो कोशिश करेंगे कि किसी तरह नो ड्यूज मिल जाए और फिर भी कर्ज चुकाने में नाकाम रहे तो किसी सहयोगी को ही मैदान में उतारेंगे।
गंाव में शुरू हुई धमाचौकड़ी
जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत और ग्राम पंचायत के चुनाव के लिए जहां एक ओर प्रशासनिक तैयारियां चल रही हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्याशियों की धमा चौकड़ी तेज हो गई है। सबसे अधिक जोर ग्राम प्रधान पद पर दिखाई दे रहा है। स्थानीय प्रतिनिधि को लेकर ग्राम पंचायत के मतदाता भी संजीदा दिखाई दे रहे हैं।
वर्जन-
- सहकारी समितियों और सहकारी बैंकों के कर्जदार नामांकन के साथ ही अनिवार्य रूप से नो ड्यूज लगाएंगे। बिना नो ड्यूज के नामांकन स्वीकार नहीं होगा। संभावित प्रत्याशी सहकारी समितियों और सहकारी बैंकों के कर्ज चुकाकर ही चुनाव लड़ेंगे। - सीपी सिंह, डीएम।