नए रंग में मार्कशीट और भगवा रंग की कुर्सियां
राज्यपाल राम नाईक और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आने से पहले डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में भगवा रंग पर बखेड़ा खड़ा हो गया है। दरअसल, विश्वविद्यालय प्रशासन ने मार्कशीट का रंग नीला से केसरिया कर दिया है। वहीं, जुबली हॉल के कार्यक्रम में लगाई जाने वाली कुर्सियां का रंग भी भगवा है।
कांग्रेस पार्टी के छात्र संगठन एनएसयूआई ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। मंगलवार को एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने कुलपति पर विश्वविद्यालय का भगवाकरण करने का आरोप लगाया।
विश्वविद्यालय में भंगवा रंग को लेकर तमाम तरह की चर्चाएं हो रही है। कुछ लोग इसके पीछे योगी सरकार को खुश करने की मंशा बता रहे हैं। वहीं, सोशल मीडिया पर भी इसका विरोध किया जा रहा है। लोग केसरिया रंग की मार्कशीट को शेयर फेसबुक और व्हाट्सएप पर शेयर भी कर रहे हैं।
नीला से केसरिया हुआ मार्कशीट का रंग
इससे पहले विश्वविद्यालय के परीक्षा परिणाम के लिए छात्रों को लंबा इंतजार करना पड़ा। परीक्षा परिणाम के बाद जब मार्कशीट आईं तो वे हैरान कर रह गए। पहले मार्कशीट का रंग नीला था, लेकिन नई मार्कशीट में केसरिया रंग का बॉर्डर है।
मार्कशीट के सबसे ऊपर विश्वविद्यालय का लोगो और नाम भी केसरिया रंग में लिखा गया है। इसके साथ ही मार्कशीट के बीचोंबीच विश्वविद्यालय के लोगो का केसरिया रंग में इंप्रेशन मौजूद है। वहीं, बैकग्राउंड का रंग भी हल्का केसरिया है।
मार्कशीट का रंग बदलने का मामला अभी चल ही रहा था। इस बीच राज्यपाल और मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में लगाई जाने वाली कुर्सियां भी भगवा रंग में रंग दी गईं। इस विवाद के बीच सोमवार को कुलपति डॉ. अरविंद दीक्षित के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्टर भी लगाए। इनमें कुलपति को संघ को पोशाक में दिखाया गया है।
25 सितंबर को आएंगे राज्यपाल और मुख्यमंत्री
बता दें कि राज्यपाल राम नाईक और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 25 सितंबर को आगरा आएंगे। वे पालीवाल पार्क परिसर में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा का अनावरण करेंगे। इसके बाद डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के जुबली हॉल में होने वाले कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। हॉल में लगी कुर्सियों को निकाल दिया गया है। इनकी जगह नई कुर्सियां लगाई जा रही हैं, जिनका रंग भगवा है।
इस संबंध में कुलपति डॉ. अरविंद दीक्षित का कहना है कि मार्कशीट से कोई भगवाकरण नहीं होता है। भगवा भी त्याग, तपस्या और बलिदान का प्रतीक है। हालांकि उन्होंने बताया कि जो एजेंसी यह मार्कशीट बनाता है, वहां से रंग बदला गया है। विश्वविद्यालय केवल मार्कशीट पर संबंधित सूचनाओं को देखता है।