दस दिन पहले मिल जाता था प्रवेशपत्र
विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों के प्राचार्यों के मुताबिक छात्र-छात्राओं को पहले प्रवेशपत्र परीक्षा शुरू होने से करीब दस दिन पहले मिल जाता था। प्रवेशपत्र मिलने के साथ ही छात्र-छात्राओं को परीक्षा केंद्र के बारे में पता चलता था। प्रवेशपत्र पर केंद्र का नाम लिखा होता था। छात्र-छात्राएं परीक्षा के लिए मानसिक रूप से तैयार हो जाते थे।
बीए, बीएससी और बीकॉम की परीक्षा के लिए केंद्र बनाए जाने की प्रक्रिया पूर्व प्रभारी कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय के समय में ही शुरू हो गई थी। प्रभारी कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कार्यभार संभालने के बाद नए सिरे से प्रक्रिया शुरू कराई। कॉलेजों की जियो टैगिंग कराई गई, बावजूद इसके परीक्षा केंद्र बनाए जाने में देरी हुई।