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100वां साल: जानें कौन थे आगरा विश्वविद्यालय के पहले कुलपति, ये है इतिहास, उपलब्धियों और बदलावों का सफर

Tue, 30 Jun 2026 11:29 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय ने 1 जुलाई 2026 से अपने 100वें वर्ष में प्रवेश कर लिया है। किराये के भवन से शुरू हुआ यह संस्थान आज A+ नैक ग्रेड और आधुनिक शिक्षा-शोध के साथ देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों में अपनी पहचान बना चुका है।
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आगरा विश्वविद्यालय - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय (आगरा विश्वविद्यालय) अपने 100वें साल में प्रवेश कर रहा है। ब्रिटिश संसद ने 1833 के एक्ट से भारत में चौथी प्रेसिडेंसी आगरा बनाई। पहले की तीन प्रेसिडेंसी कलकत्ता, मद्रास तथा बंबई थीं। आगरा में मुख्यालय भी रहा। पुनर्गठन के बाद संयुक्त प्रांत आगरा-अवध (यूपी) बना और उसी क्रम में 1 जुलाई 1927 को ब्रिटिश इंडिया के गवर्नर जनरल की सहमति के बाद आगरा विश्वविद्यालय अस्तित्व में आया। तत्कालीन गवर्नर एवं कुलाधिपति विलियम सिन्क्लेयर मॉरिस ने सेंट जोंस कॉलेज के प्राचार्य ए डब्ल्यू डेविस को आगरा विश्वविद्यालय का पहला कुलपति नियुक्त किया।
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शुरुआत में आगरा विश्वविद्यालय किराए के भवन में चला। उसके लिए भूमि एवं भवन के लिए 50 हजार रुपये की धनराशि कुलपति डेविस ने दान दी। भारतीय शिक्षा सेवा के अधिकारी और विश्वविद्यालय के पहले कार्याधिकारी के. पी. किचलू ने भी भवन के लिए 10 हजार रुपये की राशि दी थी। उसका उपयोग न होने पर 1931-32 की वार्षिक रिपोर्ट में तत्कालीन कुलपति लाला दीवानचंद ने चिंता व्यक्त की थी। विश्वविद्यालय के स्टॉक रजिस्टर में दिनांक 21 नवंबर 1927 को 30 रुपये में तीन टेबल स्टैंड खरीद दर्ज है। वर्ष 1947 तक 11 और स्वर्ण जयंती पूरे होने तक 50 कुलपति रहे। मौजूदा कुलपति प्रो. आशु रानी पहली स्थायी महिला और लगातार दो कार्यकाल पाने वाली कुलपति हैं। उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय को नैक मूल्यांकन में A+ ग्रेड प्राप्त हुआ।
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वर्ष 1996 में मायावती सरकार ने आगरा विश्वविद्यालय का नाम परिवर्तित कर डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय किया। विश्वविद्यालय के पास पालीवाल पार्क, संस्कृति भवन, खंदारी परिसर, सुल्तानगंज और छलेसर परिसर है। इंजीनियरिंग संस्थान, फार्मेसी विभाग तथा बेसिक एवं लाइफ साइंस के अनुसंधानों से समाज एवं राष्ट्र को नई दिशा मिलने वाली है। विश्वविद्यालय अपने पाठ्यक्रमों में लगातार नई शिक्षा नीति के अनुरूप परिवर्तन कर रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी विश्वविद्यालय एक केंद्र पुनः प्रारंभ कर सकता है, जिससे सामान्य आय वर्ग का छात्र भी तैयारी कर सके। - प्रस्तुति : डॉ. गिरजा शंकर शर्मा, पूर्व अध्यक्ष पत्रकारिता विभाग एवं पीआरओ डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय

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