फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

DPS छात्र से मारपीट का केस: नाबालिग पर FIR, पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल; फंस सकती है इंस्पेक्टर की गर्दन

Sat, 02 May 2026 10:50 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा के डीपीएस स्कूल मारपीट मामले में नाबालिग छात्र पर एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस कार्रवाई विवादों में आ गई है और कई पुलिसकर्मी निलंबित किए गए हैं। जांच में किशोर न्याय अधिनियम के उल्लंघन की बात सामने आने पर थाना प्रभारी सहित अन्य अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
विज्ञापन
मारपीट में घायल छात्र। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

आगरा के सिकंदरा के शास्त्रीपुरम स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल में छात्रों के बीच हुई मारपीट के मामले में नाबालिग पर प्राथमिकी दर्ज करने के मामले में निलंबित पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज हो गए हैं। जांच अधिकारी इंस्पेक्टर सहित अन्य के भी जल्द बयान दर्ज करेंगे। सूत्रों की मानें तो किशोर न्याय अधिनियम के उल्लंघन में थाना प्रभारी की गर्दन भी फंस सकती है।
विज्ञापन

 

पिछले दिनों दिल्ली पब्लिक स्कूल में दसवीं के दो छात्रों के बीच विवाद हो गया था। एक छात्र ने दूसरे छात्र के पंच मारे थे। इससे छात्र के तीन दांत टूट गए थे। जबड़े में भी चोट लगी थी। पिता ने आरोप लगाया था कि स्कूल प्रबंधन ने लापरवाही की। पुलिस से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की थी।

तीन दिन बाद थाना सिकंदरा पुलिस ने आरोपी छात्र के खिलाफ मारपीट की धारा में प्राथमिकी दर्ज कर ली दी थी। इस बात की जानकारी अधिकारियों को होने पर पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। किशोर न्याय अधिनियम का उल्लंघन किया गया था। सामान्य अपराध में आरोपी के नाबालिग होने पर जीडी में तस्करा डालकर किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष आरोपी को पेश किया जाता है। बोर्ड के निर्णय के बाद आगे की कार्रवाई की जाती है।

पिटाई के मामले में भी आरोपी की उम्र 16 साल थी। थाना पुलिस ने लापरवाही करते हुए नियम का उल्लंघन किया। इस पर एक दरोगा और दो सिपाही को निलंबित किया गया था। वहीं थाना प्रभारी प्रदीप कुमार त्रिपाठी के खिलाफ जांच के आदेश किए गए थे। इस मामले में एसीपी ट्रैफिक इमरान अहमद जांच कर रहे हैं।

निलंबित बाल कल्याण अधिकारी दरोगा औ र दो सिपाही के बयान भी दर्ज किए थे। प्राथमिकी रद्द कर दी गई थी। सूत्रों की मानें तो जांच अधिकारी अभी अन्य पुलिसकर्मियों के भी बयान दर्ज करेंगे। लापरवाही देखी जाएगी। प्राथमिकी दर्ज करने के लिए कार्यालय के मुंशी को किसने कहा? यह पता किया जाएगा। यह सिर्फ लापरवाही का मामला है या फिर कुछ यह देखा जाएगा।

उठ रहे कई सवाल
थाने में किसी आरोपी की गिरफ्तारी हो या फिर प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई, इन सभी की जानकारी थाना प्रभारी को होती है। कोई भी प्राथमिकी प्रभारी निरीक्षक के आदेश के बिना सीधे दर्ज नहीं की जा सकती। मगर दिल्ली पब्लिक स्कूल के छात्र के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने में सिर्फ कार्रवाई बाल कल्याण अधिकारी दरोगा और दो सिपाहियों पर कार्रवाई की गई।
विज्ञापन

आरोप लगाया गया कि इन्होंने किशोर न्याय अधिनियम का उल्लंघन किया। प्राथमिकी दर्ज कर ली थी। अब सवाल उठता है कि सीधे प्राथमिकी कैसे दर्ज कर ली गई, जबकि हर मामले में निरीक्षक का आदेश लेना होता है। निलंबन की कार्रवाई सिर्फ पुलिस कर्मियों पर क्यों हुई। निरीक्षक पर क्यों नहीं हुई। उन्हें थाने से हटाया गया तो दूसरे थाने का प्रभारी निरीक्षक कैसे बना दिया गया। इससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें