यमुना में ‘जहर‘ घोल रहीं इलेक्ट्रोप्लेटिंग की दर्जनभर इकाइयां सील कर दी गई हैं। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी), प्रशासन, पुलिस, नगर निगम और टोरंट की संयुक्त टीम द्वारा की गई कार्रवाई के दौरान इन इकाइयों के बिजली कनेक्शन भी काट दिए गए। ताकि चोरी-छुपे इकाइयों को संचालित न किया जा सके। यह कार्रवाई अमर उजाला की प्रकाशित खबर के बाद की गई।
अमर उजाला ने 12 फरवरी के अंक में इलेक्ट्रोप्लेटिंग इकाइयों से निकलने वाले सल्फ्यूरिक और नाइट्रिक एसिड की वजह से यमुना के दूषित होने की खबर प्रकाशित की थी। इस पर पांचों विभागों की संयुक्त टीम ने पीएसी और पुलिस बल की मौजूदगी में विजय नगर कालोनी स्थित नगला धानी में शनिवार सुबह लगभग 8.30 बजे छापेमारी की। इस क्षेत्र में इलेक्ट्रोप्लेटिंग की कई इकाइयां संचालित हो रही थीं। कुछ इकाइयां तो घर में ही चल रही थीं। कोई कुछ समझ पाता इससे पहले ही यूपीपीसीबी के क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी निरंजन शर्मा और एसीएम तृतीय अरुण कुमार के नेतृत्व में एक के बाद एक इकाइयों को सील करने की कार्रवाई शुरू की गई। कुछ लोगों ने कार्रवाई का विरोध करने की भी कोशिश की लेकिन पुलिस बल देखकर वे पीछे हट गए। कई घंटे चली कार्रवाई के दौरान दर्जनभर इकाइयां सील कर दी गईं। जिलाधिकारी के निर्देश पर की गई कार्रवाई के दौरान सील की गईं इकाइयों के बिजली कनेक्शन भी विच्छेदित कर दिए गए।
गौरतलब है कि जिलाधिकारी ने इन इकाइयों के बिजली और पानी कनेक्शन विच्छेदित करने के भी निर्देश दिए थे, जिससे कि इकाइयों को संचालित ही नहीं किया जा सके। सूत्रों की मानें तो शहर में लगभग छह दर्जन इलेक्ट्रोप्लेटिंग इकाइयां अवैध तरीके से संचालित हो रही हैं। इन सभी पर कार्रवाई होनी है। बता दें कि इन इकाइयों में धातु की वस्तुओं को चमकाने के लिए सल्फ्यूरिक एसिड प्रयोग किया जाता है। ये रसायन काफी हानिकारक है। ये नाले-नालियों के माध्यम से सीधे यमुना में मिल रहा है। इसकी वजह से लोगों को गंभीर बीमारी तो हो सकती है, फसल और जलीय जीव-जंतुओं को भी नुकसान पहुंचता है।
इन पर हुई कार्रवाई
अरुण कुमार, राम सिंह, भारत चैन, प्रेम सिंह, आलोक आर्य, राजकुमार, बीना अग्रवाल, राधेश्याम, अवधेश कुमार, संतोष कुमार, ओमवती, पूरन चंद।