आगरा में बाह के बिजौली गांव में कबीरपंथ के अनुयायियों ने धूम-धड़ाका और तड़क भड़क केबगैर सादगी के साथ विवाह करके समाज में नई मिसाल पेश की। इस विवाह में तो दुल्हन ने मेहंदी रचाई, न दूल्हे ने पगड़ी पहनी।
न दूल्हा बारात लेकर पहुंचा और न ही दुल्हन को विदा करने के लिए गाड़ी सजाई गई। और तो और दुल्हा-दुल्हन ने अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे भी नहीं लिए। इतना ही नहीं। दुल्हन की मांग में सिंदूर भी नहीं भरा गया।
सत्संग में गुरुवाणी के बीच दोनों एक दूसरे के हो गए। इस सादगी से प्रभावित होकर वहां मौजूद 200 लोगों ने अपने बच्चों की दहेज रहित शादी करने का संकल्प ले लिया। बताया गया है कि दूल्हा और दुल्हन के परिवार संत रामपाल के अनुयायी है।