-जिले में 1.64 लाख बुजुर्ग मतदाता, कासगंज विधानसभा क्षेत्र में है सर्वाधिक
मनोज माहेश्वरी
कासगंज। एटा-कासगंज लोकसभा क्षेत्र का सांसद बनना है तो प्रत्याशी बुजुर्ग मतदाताओं का आशीर्वाद लेना नहीं भूलें। बुजुर्गों के वोट के बिना सांसद बनना मुश्किल है। जिले की तीनों विधानसभाओं में 163952 बुजुर्ग मतदाता हैं। यह संख्या कुल मतदाताओं की 15.65 प्रतिशत से अधिक है। यह आंकड़ा किसी भी प्रत्याशी के पक्ष में काफी अहम साबित होगा।
आम मान्यता है कि किसी अच्छे कार्य के लिए जाते समय यदि बुजुर्ग का आशीर्वाद मिल जाए तो उसमें सफलता अवश्य मिलती है। लोकसभा चुनाव-2024 के लिए सपा एवं भाजपा ने अपने प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतार दिए हैं। वहीं, अन्य दल भी अपने उम्मीदवारों के नाम जल्द ही घोषित कर देंगे। वहीं निर्दलीय प्रत्याशी भी चुनाव लड़ेंगे। आगामी लोकसभा चुनाव में जो भी प्रत्याशी चुनाव मैदान में रहेंगे उनके लिए बुजुर्ग मतदाताओं का आशीर्वाद अहम साबित होगा। इसके बिना वे क्षेत्र के सांसद नहीं बन सकेंगे। लोकसभा चुनाव के लिए जो मतदाता सूची तैयार की गई है उसमें 60 साल या इससे अधिक आयु के 163202 मतदाताओं के नाम शामिल हैं। जिसमें सबसे अधिक बुजुर्ग मतदाता कासगंज विधानसभा में हैंं। इस विधानसभा में 57413 बुजुर्ग मतदाता निवास करते हैं। पटियाली विधानसभा में यह संख्या 55555 है। वहीं, अमांपुर विधानसभा में यह संख्या 50984 है।
347 मतदाता हैं शतायु : जिले की तीनों विधानसभा में 347 मतदाता ऐसे भी हैं जो सौ साल या उससे ऊपर की आयु के हैं। जिसमें सबसे अधिक 161 मतदाता कासगंज विधानसभा में है। वहीं पटियाली विधानसभा में 94 तथा अमांपुर विधानसभा में 92 मतदाता 100 साल के आंकड़े को पार कर गए हैं।