शैक्षणिक, धार्मिक एवं चैरिटेबल ट्रस्टों व संगठनों को दान में दी रकम के इस्तेमाल को लेकर अब दानदाता को भी सजग रहना होगा। अगर दान की रकम का इस्तेमाल ट्रस्ट ने टेरर फंडिंग, मनी लॉन्ड्रिंग या किसी अन्य अपराध के लिए किया तो उसके सदस्यों पर कार्रवाई होगी। साथ ही दानदाता भी जांच के दायरे में आएंगे।
मंगलवार को संजय प्लेस स्थित आयकर कार्यालय पर आयोजित कार्यशाला के दौरान पहुंचे आयकर अधिकारियों ने यह जानकारी दी। आयकर आयुक्त (छूट) लखनऊ मजहर अकरम के दिशा निर्देश और अपर आयकर आयुक्त (छूट) डॉ. अमरजोत की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम के दौरान शैक्षणिक, धार्मिक एवं चैरिटेबल ट्रस्ट से संबंधित आयकर प्रावधानों को बताया गया। इस दौरान आयकर अधिकारी (छूट) आगरा अतुल चतुर्वेदी ने मौजूद लोगों को आयकर अधिनियम के वर्तमान प्रावधानों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि सभी ट्रस्ट व संस्थाएं जिस उद्देश्य के लिए दान दिया गया या उन्होंने लिया, वह उसी कार्य में रकम को लगाएं। इसके साथ ही दानदाता, ट्रस्ट से जुड़े लोग और ऑडिट करने वाले अधिकारी इस बात पर खास ध्यान रखें कि कहीं ट्रस्ट रकम का दुरुपयोग गंभीर अपराध, टेरर फंडिंग या मनी लॉन्ड्रिंग के लिए न कर रहा हो। अपर आयकर आयुक्त डॉ अमरजोत ने आयकर अधिनियम 2025 में चेरिटेबल संस्थाओं से संबंधित प्रावधानों में होने वाले परिवर्तन व सरलीकरण की जानकारी दी।
इस दौरान सीए राकेश अग्रवाल ने छूट का दावा करने वाले करदाताओं के संस्थाओं के पंजीकरण, आयकर आयकर विवरणी एवं ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करते समय होने वाली गलतियों और उनसे बचने के तरीके बताए। कार्यक्रम में नेशनल चैंबर के पूर्व अध्यक्ष अनिल वर्मा, सचिव आईसीएआई अंकित मित्तल, टैक्सेशन बार एसोसिएशन आगरा के अध्यक्ष अक्षय कुलश्रेषठ, सचिव संजीव वशिष्ठ, नवीन गर्ग, राजकिशोर के अलावा कई धार्मिक, शैक्षणिक एवं चैरिटेबल संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। मंच संचालन आयकर निरीक्षक (छूट) यतींद्र पांडेय ने किया।