मैनपुरी। जिला अस्पताल में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट का संचालन जल्द शुरू होगा। उम्मीद है कि इस महीने के अंत तक यूनिट काम शुरू कर देगी। आधुनिक ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट में खून से चार तत्वों को अलग-अलग करने के लिए जर्मनी की मशीनें और उपकरण लगाए गए हैं। यूनिट शुरू होने के बाद एक यूनिट ब्लड चार लोगों की जिंदगी बचाने का काम आएगा।
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में 600 यूनिट खून स्टॉक की क्षमता है। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक से साल भर में 3000 से 3500 जरूरतमंदों को रक्त उपलब्ध कराया जाता है। अब तक यहां ब्लड कंपोनेंट यूनिट न होने से एक यूनिट ब्लड एक जरूरतमंद के ही काम आता है। कंपोनेंट यूनिट चालू होने के बाद एक यूनिट ब्लड चार जिंदगियां बचाने के काम आएगा।
जिला अस्पताल की ब्लड बैंक के ही भवन का विस्तार किया गया है ब्लड बैंक के पास में ही पड़ी जगह पर ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट का भवन तैयार कराया गया है। बुधवार को यहां पहुंचे जिलाधिकारी अविनाश कृष्ण सिंह ने यूनिट का निरीक्षण किया और यूनिट के शीघ्र संचालन के निर्देश दिए।
ब्लड बैंक में तैनात चिकित्साधिकारी डॉ. शिखा अग्रवाल का कहना है कि कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट में ब्लड की एक यूनिट को चार अलग-अलग तत्वों रेड ब्लड सेल (आरबीसी), प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और क्रायोप्रेसीपिटेट में विभाजित करने का काम किया जाएगा। इसके बाद जरूरतमंदों को ब्लड के जरूरी तत्व ही दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि अब तक जिले में सभी प्रकार के जरूरतमंदों को रक्त चढ़ाया जाता है। इनमें वे जरूरतमंद भी शामिल होते हैं जिनको ब्लड के कुछ तत्वों की जरूरत होती है। कंपोनेंट यूनिट के काम चालू करने के बाद जरूरतमंदों को रक्त के वही तत्व दिए जाएंगे जिनकी उनको जरूरत है। ऐसे में एक यूनिट रक्त चार लोगों की जिंदगी बचाने के काम आएगा। संवाद
डेंगू रोगियों को आसानी से मिल सकेंगे प्लेटलेट्स
मच्छर जनित बीमारियों के लिहाज से मैनपुरी में खतरा अधिक रहता है। डेंगू के रोगी के रक्त में प्लेटलेट्स की संख्या तेजी से कम हो जाती है। अब तक जिले में ब्लड के प्लेटलेट्स तत्व की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में रोगियों की जान बचाने के लिए परिवार के लोगों को सैफई, आगरा और कानपुर तक की दौड़ लगानी होती है। जिले में ब्लड कंपोनेंट यूनिट चालू होने के बाद जिला अस्पताल में ही आसानी से डेंगू रोगियों को प्लेटलेट्स मिल सकेगा।
इस तरह काम करती है कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट
ब्लड में चार कंपोनेंट होते हैं। सेपरेशन यूनिट में ब्लड की परत दर परत को अलग किया जाता है। इसके बाद आरबीसी, प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और क्रायोप्रेसीपिटेट अलग-अलग हो जाते हैं। जरूरत के मुताबिक इनको निकाल लिया जाता है। निकाले गए रक्त के प्रत्येक तत्व की अलग-अलग जीवन अवधि होती है। एक यूनिट रक्त तीन से चार लोगों की जरूरत पूरी कर सकता है।
जिला अस्पताल में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट को शुरू करने के प्रयास तेजी के साथ किए जा रहे हैं। यूनिट के लिए भवन के साथ ही जरूरती मशीनें और अन्य उपकरण भी आ गए हैं। कुछ मशीनें रह गई हैं जो इसी सप्ताह आने की उम्मीद है। यूनिट की व्यवस्थाएं पूरी होते ही यूनिट को शुरू करा दिया जाएगा। - डॉ. मदनलाल, सीएमएस