भोगांव।गांव सरैया निवासी एक युवक सीआरपीएफ में चालक के पद पर तैनात था। वहां इलाज के दौरान मौत के बाद बृहस्पतिवार को शव गांव लाया गया। लेकिन परिजन ने वाहन से शव नहीं उतरने दिया। हंगामा करते हुए अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। मामला थाने पहुंचा तो पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया।
थाना क्षेत्र के गांव सरैया निवासी रंजीत सिंह (35) सीआरपीएफ भोपाल ग्रुप केंद्र पर चालक के पद पर तैनात थे। 13 जून को ड्यूटी खत्म कर क्वार्टर पर लौट कर आए थे। वहां उनके पेट में दर्द होने लगा। दवा खाकर आराम करने के लिए रंजीत लेट गए। जब दर्द बर्दाश्त से बाहर हो गया तो ग्रुप केंद्र भोपाल के चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। वहां भी राहत न मिलने के बाद कोर के इंस्पेक्टर आरपी शुक्ला ने उच्चधिकारियों के आदेश पर रंजीत को भोपाल एम्स में भर्ती कर दिया था। वहां करीब 24 घंटे इलाज के बाद 14 जून को रात मृत्यु हो गई। मौत की खबर मिलते ही परिजन में कोहराम मच गया। बृहस्पतिवार को सरकारी वाहन से रंजीत का शव गांव पहुंचा। गार्ड ऑफ ऑनर की तैयारी हो गई। इस बीच रंजीत के पिता महाराम सिंह व अन्य परिजन ने शव को वाहन से उतारने से रोक दिया। ग्रामीणों ने अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया।
ग्रामीणों का आक्रोश देख सीआरपीएफ कर्मी शव वाहन थाने ले गए। इसके बाद ग्रामीण थाने पहुंच गए। वहां पुलिस को पोस्टमार्टम कराने की तहरीर दी गई। इसके बाद शव जिला मुख्यालय स्थित मोर्चरी भिजवाया गया। थाना प्रभारी ने बताया कि पिता की तहरीर पर मौत का कारण जानने के लिए पोस्टमार्टम कराया गया है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।